रांची, राज्य ब्यूरो। मुख्यमंत्री रघुवर दास की घोषणा के बाद झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद ने मंगलवार को झारखंड एकेडमिक काउंसिल से शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण लगभग 50 हजार अभ्यर्थियों के नाम मंगा लिए हैं। काउंसिल के अध्यक्ष अरविंद प्रसाद सिंह ने इसकी पुष्टि की है। पारा शिक्षकों के हड़ताल से काम पर नहीं लौटने पर इन टेट पास अभ्यर्थियों को स्कूलों में नियुक्त किया जाएगा। बुधवार से इसकी कार्रवाई शुरू हो सकती है।

अवकाश होते हुए भी परियोजना कार्यालय खुला रखा गया है। वहीं, काम पर नहीं लौटनेवाले सभी पारा शिक्षकों को शो-कॉज करते हुए सेवा मुक्त करने की कार्रवाई शुरू हो सकती है। इधर, 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर हंगामा के दौरान गिरफ्तार कर जेल भेजे गए पारा शिक्षकों को मुक्त कराने के लिए पलामू छोड़ सभी प्रमंडलों के हजारों पारा शिक्षकों ने मंगलवार को जेल भरो अभियान चलाया।

पारा शिक्षकों ने अपनी पत्नी, माता-पिता तथा बच्चों के साथ अपने-अपने क्षेत्र के थानों में सांकेतिक गिरफ्तारी दी। बाद में सभी को छोड़ दिया गया। पलामू प्रमंडल के पारा शिक्षक 22 नवंबर को यह जेल भरो अभियान चलाएंगे। वहीं, राज्य सरकार द्वारा 20 नवंबर तक काम पर लौटने के अल्टीमेटम की समय सीमा भी शाम तीन बजे खत्म हो गई। लेकिन अधिसंख्य हड़ताली पारा शिक्षक स्कूल लौटने के बजाए दोपहर से ही अपने-अपने क्षेत्रों में जमा होकर जुलूस के शक्ल में थाने पहुंचे।

थाना परिसर के अंदर तथा सामने बैठकर सभा भी की। इस दौरान सरकार विरोधी नारे भी लगे। कई थानों में आंदोलनकारी पारा शिक्षकों को कैंप जेल में रखा गया। बाद में सभी को छोड़ दिया गया। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा है कि जबतक जेल भेजे गए पारा शिक्षकों पर सभी धाराएं हटाई नहीं जाती और उन्हें जमानत नहीं मिल जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

कई जिलों में एक भी पारा शिक्षक काम पर नहीं लौटे :  जामताड़ा, हजारीबाग, लातेहार, चतरा, सिमडेगा, देवघर, गोड्डा, देवघर, गढ़वा और पलामू जिले में तो एक भी पारा शिक्षक काम पर नहीं लौटे। पूर्वी सिंहभूम में 67 पारा शिक्षकों के काम पर लौटने की सूचना है। इनमें 48 डीएलएड का प्रशिक्षण लेनेवाले पारा शिक्षक शामिल हैं। वहीं, पश्चिमी सिंहभूम में 60 पारा शिक्षकों के हड़ताल से वापस लौटने की सूचना है। सरायकेला-खरसावां, गिरिडीह, लोहरदगा और पाकुड़ में भी कुछ शिक्षक काम पर लौटे हैं।

हजारों स्कूल बंद, मिड डे मील भी प्रभावित : पारा शिक्षकों की हड़ताल से मंगलवार को भी हजारों स्कूल बंद रहे। इससे बच्चों को मिड डे मील भी नहीं मिल रहा है। दूसरी तरफ, मामले को सुलझाने के लिए दोनों पक्षों की ओर से वार्ता की कोई पहल नहीं हो रही है। वहीं, विपक्षी राजनीतिक दल इस मुद्दे को भुनाने में लगे हैं।

आज बीआरसी में धरना देंगे पारा शिक्षक : हड़ताली पारा शिक्षक बुधवार को अपने-अपने प्रखंड संसाधन केंद्रों में धरना देंगे। एकीकृत पारा शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने मंगलवार को इस संबंध में निर्णय लिया।

डीएलएड का प्रशिक्षण ले रहे पारा शिक्षकों की बढ़ी परेशानी : हड़ताल से राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान से डीएलएड का प्रशिक्षण ले रहे पारा शिक्षकों की परेशानी बढ़ गई है। अभी इनका प्रशिक्षण चल रहा है, जिससे वे असमंजस की स्थिति में हैं। बताया जाता है कि इनमें से कई पारा शिक्षक या तो हड़ताल पर नहीं हैं, या कुछ हड़ताल से लौट रहे हैं। बता दें कि केंद्र सरकार ने अप्रशिक्षित शिक्षकों को एनआइओएस से प्रशिक्षण लेने का अंतिम मौका प्रदान किया है। मार्च 2019 से कोई भी अप्रशिक्षित शिक्षक पठन-पाठन नहीं कराएंगे।

पारा शिक्षकों के मुद्दे पर बोलीं शिक्षा मंत्री : शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पारा शिक्षकों को 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आंदोलन नहीं करना चाहिए था। मुख्य सचिव ने भी ऐसा नहीं करने का उनसे अनुरोध किया था, जिसे पारा शिक्षकों ने नहीं माना। इसे कतई ठीक नहीं कहा जा सकता। शिक्षा मंत्री ने पहली बार पारा शिक्षकों के मुद्दों पर अपना विचार रखा।

मंगलवार को अपने कार्यालय कक्ष में मीडिया से बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि राज्य का स्थापना दिवस उत्सव का दिन था। किसी खास पार्टी का दिन या उत्सव नहीं था। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ही पारा शिक्षकों को लाई थी। वर्तमान सरकार और स्वयं मुख्यमंत्री भी उनकी बातों को हमेशा गंभीरतापूर्वक सुनते रहे। 2015 से अबतक पारा शिक्षकों के दोनों गुटों के साथ कई बार वार्ता हुई।

उनकी पांच-सात मांगों में एक मांग को छोड़कर सभी पर सरकार ने कार्रवाई की। यह एक रिकार्ड है। फिर पारा शिक्षक संघों ने कहा कि उनके स्थायीकरण की मांग को लेकर कमेटी गठित कर दी जाए। राज्य सरकार ने ऐसा भी किया। कहा, मुख्य सचिव के निर्देश पर कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई।

कमेटी की अनुशंसा पर कल्याण कोष की राशि पांच करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ करने पर सहमति दी गई। टेट की मान्यता पांच साल से बढ़ाकर सात साल करने पर सहमति बनी। साथ ही 20 फीसद मानदेय बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले, मंत्री ने विभागीय सचिव एपी सिंह को बुलाकर पारा शिक्षकों की मांगें, हड़ताल की स्थिति तथा किए गए वैकल्पिक उपायों की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी हाल में स्कूल बंद नहीं होने चाहिए।

शिक्षा में पारा शिक्षकों की अहम भूमिका : मंत्री ने स्वीकार किया बच्चों के पठन-पाठन तथा उन्हें अच्छी शिक्षा देने में पारा शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन पारा शिक्षकों को अपने पद का मान-सम्मान भी रखना चाहिए था। उन्हें संयम और धैर्य रखने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे विषयों में राजनीति नहीं होनी चाहिए। मामले को सुलझाने के लिए बैठकर बात-विचार को आगे बढ़ाना चाहिए।

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