खूंटी एटकेडीह से लौटकर संजय साहू सरकार की घोषणाओं की हकीकत जाननी है तो खूंटी के सैको थाना क्षेत्र के कुदा पंचायत के एटकेडीह चलें। यह गांव भगवान बिरसा मुंडा के सेनापति रहे गया मुंडा का है। सरकार की झारखंड सेनानी कोष, शहीद आदर्श ग्राम सहित अन्य योजनाओं के रहते यहां बेरोजगारी और कुपोषण से शहीद के वंशजों लगातार मर रहे हैं। एक वर्ष में शहीद के कुल चार वंशज काल के गाल समा चुके हैं। अब तो उनके अस्तित्व पर भी संकट मंडराने लगा है। बुधवार को शहीद गया मुंडा के पौत्र लाल मुंडा की मौत हो गई जबकि मंगलवार (13 नवंबर) को ही लाल मुंडा के पौत्र सोमा मुंडा (पिता रमई मुंडा) की मौत लगातार कुपोषण से बीमार रहने के कारण सदर अस्पताल खूंटी में हो गई थी। शहीद गया मुंडा के पांचवीं पीड़ी के रमई मुंडा बताते हैं कि इसी वर्ष अगस्त में उनके भाई सीताराम मुंडा की भी मौत हो गई थी। उसके पूर्व मार्च में सीताराम की पत्‍‌नी मितनी मुंडाईन की मौत हो गई थी। शहीद के परिवार में अब सिर्फ एक ही व्यस्क पुरूष बचा है रमई मुंडा। बेहद दर्द से रमई बताते हैं कि कहने को तो उनके पास 14 एकड़ जमीन है लेकिन सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण एक धेला भी नहीं उपजता। मजबूरी में वे कभी लकड़ी बेचते हैं तो कभी वाहन चलाते हैं। थोड़ी-बहुत खेती भी हो जाती है। कई सांसद, विधायकों व मंत्री की अनुशंसा के बाद भी इन्हें चालक की नौकरी नहीं मिली। शहीद गया मुण्डा के परिवार में अब सिर्फ रमई के चार नाबालिग पुत्र बुधु मुंडा, लाल मुंडा, गया मुंडा व मदिराय मुंडा बचे हैं। जिनमें बुधु गंभीर रूप से कुपोषण का शिकार है इसे मुरहू प्रखंड के विडियो प्रदीप भगत ने इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया है। रमई की पत्‍‌नी बत्ती मुंडाईन की स्थिति भी कुपोषण के कारण काफी खराब है।

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