प्रवीण प्रियदर्शी, रांची : प्रधानमंत्री ने रांची को बेहद महत्वकांक्षी आयुष्मान भारत योजना (प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना) की लांचिंग के लिए चुन झारखंड को जो सम्मान दिया उससे हर झारखंडवासी को गर्व की अनुभूति हुई। इसके साथ बिरसा की भूमि पर अपने 40 मिनट के भाषण में प्रधानमंत्री ने चार बार बिरसा भगवान के नाम की चर्चा कर उन्हें नमन-स्मरण किया। दुनिया की इस सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना को देश के 125 करोड़ लोगों को समर्पित करते हुए प्रधानमंत्री ने तो बेहद भावुक शब्दों में कहा कि मेरे लिए यह गर्व की बात है कि भगवान बिरसा की धरती से इसे लागू करने का सौभाग्य मुझे मिला। याद हो कि इसके पूर्व 15 अगस्त को लाल किला के प्राचीर से अपने संबोधन में भी प्रधानमंत्री ने भगवान बिरसा के योगदान को नमन कया था। बिरसा भगवान के प्रति इतना सम्मान अब तक किसी भी प्रधानमंत्री ने अभिव्यक्त नहीं किया था। अब इसे राजनीति की कोई चाल कहें या हृदय के अंतस्त से निकले उद्गार इसके कई मायने निकल रहे हैं। एक बेहद कठिन लोकसभा चुनाव सामने है। संयुक्त विपक्ष सहित एनडीए अपने एक-एक वोट को संजोने में लगे हैं। झारखंड में भी भाजपा के पास कम चुनौती नहंी है, स्थानीयता नीति का सवाल हो, भूमि अधिग्रहण कानून का, पत्थलगड़ी का या धर्म परिवर्तन कानून का। इन सारे मुद्दों पर आदिवासी समाज को विभ्रमित करने के कई प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इन्हें साधने के लिए भगवान बिरसा की शरण को सबसे उपयुक्त माना। भगवान बिरसा के प्रति जो सम्मान दर्शाया गया वह इस समुदाय के एक वर्ग को प्रभावित किए बिना नहीं रहेगा। वहीं प्रतिसंवाद की मजबूत कड़ी भी गढ़ी जाएगी। भूमि अधिग्रहण कानून, स्थानीयता नीति और पत्थलगड़ी से उत्पन्न कटुता को साध आयुष्मान योजना के मरहम से आदिवासी समाज में पार्टी की पैठ को बरकरार रखना भी इस प्रतिसंवाद का हिस्सा बनेगा। प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में स्पष्ट कर दिया कि योजना बनाने और लागू करने से ज्यादा चुनौती उसे जमीन पर उतारने में आएगी। इसके लिए उनकी टीम ने व्यापक तैयारी की है। साफ है प्रधानमंत्री योजना के महत्व को काफी संजीदगी से समझ रहे हैं, इसलिए इसे सफलता पूर्वक जमीन पर उतारने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी। योजना की सफलता के साथ बिरसा के सम्मान का रसायन जब झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में फैलेगा तो इसका अलग ही असर देखने को मिलेगा।

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