रांची, राज्य ब्यूरो। जमीन-जायदाद के लालच में आदिवासी महिलाओं से शादी करने वालों का फंसना लगभग तय है। तीन अगस्त को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई टीएसी की बैठक में इस मसले पर बनी आम सहमति के मसौदे पर सरकार रेस है। ओडिशा में प्रभावी शिड्यूल एरिया ट्रांसफर इमूवेबल प्रोपर्टी बाई शिड्यूल ट्राइब्स रेगुलेशन की तर्ज पर सरकार ने इससे संबंधित प्रस्ताव लगभग तैयार कर लिया है। राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से तैयार इस मसौदे पर राज्यपाल की सहमति और राष्ट्रपति का अनुमोदन मिलते ही यह रेगुलेशन पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगा।

बताते चलें कि ओडिशा के इस रेगुलेशन में गैर आदिवासियों द्वारा जनजातीय महिलाओं से शादी करने के बाद जमीन खरीदने पर संबंधित महिलाओं को अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं मानते हुए भूमि वापसी की कार्रवाई की कार्रवाई का प्रावधान है। अगर झारखंड में भी यह रेगुलेशन प्रभावी हो जाता है तो इसकी जद में कई अफसर भी आएंगे। सूत्रों के अनुसार प्रस्ताव तैयार करने से पूर्व सरकार ने इस मसौदे पर न सिर्फ कानूनी राय ली है, बल्कि अन्य राज्यों में प्रभावी इससे मिलते-जुलते प्रावधानों का अध्ययन भी किया है।

तीन अफसरों पर हो सकती है कार्रवाई : गैर आदिवासी परिवार की संतान होने के बावजूद आदिवासी की पहचान देकर राज्य प्रशासनिक सेवा में आए तीन अफसरों पर भी कार्रवाई की तैयारी कर ली गई है। कार्मिक विभाग के सूत्रों के अनुसार तीनों अधिकारियों के खिलाफ फाइल तैयार की जा रही है और आधार पुख्ता करने के बाद इन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया जाएगा।

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