रांची, राज्य ब्यूरो। स्कूलों के विलय से विद्यालयों से बच्चों की दूरी बढ़ने के मद्देनजर राज्य सरकार अब कक्षा छह से ही बच्चों को साइकिल देगी। जिन बच्चों को स्कूल आने के लिए दो किमी से अधिक दूरी तय करनी होगी उन्हें इसका लाभ मिलेगा। अब तक कक्षा आठ से बच्चों को साइकिल मिलती थी। वहीं, कक्षा छह से नीचे के बच्चों को स्कूल दूर होने पर बस की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री रघुवर दास ने शुक्रवार को धुर्वा स्थित ज्यूडिशियल एकेडमी सभागार में आयोजित 'हर बच्चा छुएगा आसमां' कार्यक्रम में इसकी घोषणा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने एक साथ तीन योजनाओं ज्ञानसेतु, ई-विद्यावाहिनी तथा यातायात सुविधा के साथ स्कूलों के पुनर्गठन का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने चार वर्षो में शिक्षा के क्षेत्र में कई सुधार किए। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की प्राथमिकता है और तीनों योजनाओं का शुभारंभ इसी का प्रयास है। उन्होंने शिक्षा की गिरती व्यवस्था के लिए यूपीए को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उसने शिक्षा को पूरी तरह बर्बाद कर दिया था। ऐसे में ही प्राइवेट स्कूल पनपने लगे। कहा, आजादी के बाद सत्ता में बैठे लोगों ने शिक्षा पर कभी ध्यान ही नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर ज्ञानसेतु योजना के तहत बच्चों के लिए तैयार वर्क बुक का विमोचन किया। उन्होंने ई-विद्यावाहिनी योजना के तहत सभी डीईओ-डीएसई को टैब भी प्रदान किया। उक्त योजनाओं में बेहतर काम करने के लिए लोहरदगा और जमशेदपुर के डीसी, डीईओ, डीएसई तथा वर्क बुक तैयार करनेवाले 14 पदाधिकारियों, शिक्षकों को प्रशंसा पत्र सौंपा।

जिम्मेदारी व ईमानदारी से करें काम : नीरा : इस अवसर पर शिक्षा मंत्री नीरा यादव ने पदाधिकारियों, शिक्षकों से पूरी जिम्मेदारी व ईमानदारी से काम करने का आह्वान किया। कहा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए फंड की कोई कमी नहीं है। उन्होंने स्कूल अवधि में शिक्षकों को बैठकों में नहीं बुलाने का निर्देश दिया।

अभी कक्षा आठ में मिलती है साइकिल : राज्य सरकार अभी कक्षा आठ के बच्चों को साइकिल देती है। एससी, एसटी तथा ओबीसी बच्चों को कल्याण विभाग द्वारा साइकिल मिलती है, वहीं सामान्य छात्र-छात्राओं को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग साइकिल देता है। शिक्षा सचिव एपी सिंह के अनुसार, इस साल कक्षा छह, सात और आठ के बच्चों को साइकिल मिलेगी ताकि कक्षा सात और आठ के बच्चे इससे वंचित न रहें। इसके बाद कक्षा छह से ही सभी बच्चों को साइकिल दी जाएगी।

स्कूलों की अब ऑनलाइन मॉनीट¨रग : ई-विद्यावाहिनी के तहत अब स्कूलों की शैक्षणिक व प्रशासनिक गतिविधियों की ऑनलाइन मानीट¨रग होगी। शिक्षकों को दिए गए टैब के माध्यम से उनकी तथा बच्चों की उपस्थिति, मिड डे मील व अन्य गतिविधियों की रिपोर्ट भेजी जाएगी। डैश बोर्ड के माध्यम से सभी डाटा को देखा जा सकेगा। बीआरपी-सीआरपी भी स्कूलों का निरीक्षण कर टैब के माध्यम से रिपोर्ट भेजेंगे।

पहली बार बच्चों को वर्क बुक : ज्ञानसेतु कार्यक्रम के तहत सरकारी स्कूलों में पहली बार बच्चों को वर्क बुक उपलब्ध कराई जाएंगी। कक्षा एक से पांच तक प्रारंभ के डेढ़ घंटे बच्चों का लर्निग स्तर बढ़ाने के लिए विशेष कक्षाएं चलेंगी। वहीं, कक्षा छह से नौ तक एक माह केवल विशेष कक्षाएं संचालित की जाएंगी ताकि बच्चों का लर्निग स्तर बढ़ सके।

मुख्यमंत्री बोले :

- प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए सरकार धन में कमी नहीं होने देगी।

- स्कूलों के नए भवन बन गए हैं तो जर्जर भवनों को नष्ट कर दें। नए के पास जर्जर भवन होने से छवि धूमिल होती है।

-कोई भी बालिका स्कूल से बाहर न रहे, इसे सुनिश्चित करें।

-चेक एंड बैलेंस जरूरी है। लापरवाह पदाधिकारियों, कर्मियों पर कड़ी कार्रवाई करें।

-झारखंड एक-दो साल में शिक्षित राज्य बनेगा। दुनिया के विकसित राज्यों की बराबरी करेगा।

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