रांची, राज्य ब्यूरो। सरकार ने 2022 तक झारखंड को बहुत हद तक कुपोषण से मुक्ति दिलाने की परिकल्पना की है। महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग, पंचायती राज जैसे 18 विभागों के आपसी समन्वय से इस लक्ष्य को भेदने का रोडमैप सरकार ने तैयार किया है।

इस अवधि में कुपोषण पर चौतरफा वार की तैयारी है। इस दौरान बच्चे, किशोरियां, गर्भवती और धातृ महिलाओं पर अलग-अलग फोकस होगा। इन चारों वर्गो को निर्धारित समय पर पूरक पोषाहार मुहैया कराने पर सरकार का जोर होगा। राज्य में संचालित 38640 आंगनबाड़ी केंद्रों की लगभग 75 हजार सेविकाएं- सहायिकाएं सरकार के इन प्रयासों को विशेष तौर पर गति देगी।

सरकार की योजना 2022 तक छह वर्ष तक के बच्चों में नाटापन के स्तर से 38.4 फीसद से कम कर 25 फीसद तक लाना है। इसी तरह संतुलित पोषाहार की कमी के कारण उत्पन्न परेशानियों, एनीमिया तथा कम वजन की समस्या में क्रमश: दो, तीन और दो फीसद की कमी प्रति वर्ष लाना है।

अति कुपोषित बच्चों-महिलाओं के लिए 10 हजार पोषण सखियां : अति कुपोषित बच्चों और महिलाओं पर खास फोकस करने के लिए सरकार ने राज्य पोषण मिशन का गठन किया है। इसके तहत पूरे राज्य में 10388 पोषण सखियां बहाल की गई हैं।

पोषण सखियां आंगनबाड़ी सेविकाओं के सहयोग से टोला स्तर पर अति कुपोषित बच्चों तथा महिलाओं की न सिर्फ पहचान करेगी, बल्कि उन्हें नियमित तौर पर दवा खिलाएंगी और आवश्यकता महसूस होने पर बेहतर इलाज के लिए कुपोषण उपचार केंद्रों में उन्हें भर्ती कराएंगी।

पूरक पोषाहार पर फोकस, न्यूट्री गार्डेन पर जोर : सरकार ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से संचालित पूरक पोषाहार कार्यक्रम को एक-एक लाभुक तक पहुंचाने का टास्क अफसरों को सौंपा है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को सप्ताह में तीन दिन अंडा तथा अंडे नहीं खाने वाले बच्चों को निश्रि्वत तौर पर मौसमी फल देने की हिदायत दी है।

गर्भवती और धातृ महिलाओं को उनके घर पर ही संतुलित पोषाहार उपलब्ध कराने के लिए न्यूट्रीगार्डेन (पोषक वाटिका) कार्यक्रम की शुरूआत की है। इसके तहत लाभुक के घर पर रिक्त पड़ी भूमि पर मौसमी फल एवं पत्तेदार साग-सब्जियां लगाई जा रही हैं।

32.40 लाख किशोरियां पर सरकार की विशेष नजर : 14 से 24 वर्ष की राज्य की 32.40 लाख किशोरियों तथा युवतियों पर सरकार की विशेष नजर है। उनके सशक्तिकरण पर 540 करोड़ रुपये खर्च करने की दिशा में सरकार ने विश्व बैंक से करार किया है। यह राशि किशोरियों के अनौपचारिक शिक्षा, कौशल विकास, रोजगारपरक आदि कार्यक्रमों पर खर्च होगी।

सरकार के अन्य कार्यक्रम : खाद्य सुरक्षा कानून से जुड़े राज्य के 56 लाख परिवारों को जन वितरण प्रणाली के माध्यम से मिल रहा अनाज।

- मुख्यमंत्री दाल-भात योजना के तहत पांच रुपये में परोसी जा रही भोजन की थाल।

- पोषाहार से संबंधित जानकारियां तथा शिकायतों का आदान प्रदान करने के लिए सरकार ने की हेल्पलाइन नंबर (14408) की शुरुआत।

- आदिम जनजातियों के परिवारों तक डाकिया योजना के माध्यम से घर-घर पहुंच रहा 35 किलोग्राम अनाज।

- मध्याह्न भोजन योजना के तहत पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को मिल रहा दोपहर का भोजन।

- आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से 16 लाख बच्चों और महिलाओं के बीच बांटे जा रहे हैं पूरक पोषाहार।

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