जागरण संवाददाता, रांची : स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ आत्मीयता भरा रिलेशन बनाएं। सेल्फ स्टडी अधिक से अधिक करें, बच्चों को बेस्ट दें ताकि बेस्ट प्रोड्यूस हो। साफ-सफाई का भी पूरा ध्यान रखें। बच्चे स्वच्छ रहेंगे तो स्वस्थ रहेंगे फिर पढ़ाई भी अच्छी तरह कर पाएंगे। वे शनिवार को बालकृष्णा प्लस टू उवि में स्वच्छता पखवाड़ा के उद्घाटन के मौके पर बोल रहे थे। प्रधान सचिव ने शिक्षकों से कहा कि खुद को अपडेट नहीं रखेंगे तो डिटोरिएट करेंगे। खुद के लिए जस्टिफाई करें। इस मौके पर बच्चों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई गई। मौके पर डीइओ रतन कुमार महावर, डीएसई शिवेंद्र सिंह, प्राचार्या दिव्या सिंह सहित अन्य थे। ..और बच्चे करते रहे इंतजार

स्वच्छता पखवाड़ा की शुरुआत मारवाड़ी प्लस टू विद्यालय से होना था। इसकी पूरी तैयारी कर ली गई थी। विभाग से यही सूचना दी गई। बच्चे सुबह से 1:30 बजे तक प्रधान सचिव के पहुंचने का इंतजार करते रहे, लेकिन वे नहीं पहुंचे। इसके बाद प्राचार्य ने सभी को स्वच्छता की शपथ दिलाई। बेस्ट सुविधा में प्रोडक्ट वेस्ट क्यों

प्रधान सचिव ने कहा कि शिक्षक शहर में रहना पसंद करते हैं। उन्हें सारी सुविधाएं मिलती हैं। लेकिन बेस्ट सुविधा में रहते हुए वेस्ट क्यों प्रोडक्ट कर रहे हैं। सरकार कुछ फैसला लेती है तो विरोध होने लगता है। कहा, राष्ट्रीय स्वच्छता के पैमाने पर शहर के एक भी स्कूल का चयन नहीं हुआ। बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन दें। पढ़ा-लिखा व्यक्ति जिस भी क्षेत्र में जाएगा सबसे अच्छा करेगा। मां बुलाए खाना के लिए तो पढ़ने बैठ जाए

प्रधान सचिव ने कहा बच्चों की फंडामेंटल क्लियर करने की जिम्मेदारी शिक्षकों की है। यह बहुत जरुरी भी है। बच्चों को ऐसा पढ़ाएं कि जब वह स्कूल से घर पहुंचे तो मां खाना के लिए बुलाती रहें और वह पढ़ने बैठ जाएं। टीचर अपना बेस्ट देते हैं तो बच्चों का इंट्रेस्ट इस लेवल तक हो जाता है। मात्र 35 प्रतिशत पर हो रहा है चयन

प्रधान सचिव ने कहा कि इस बार जेइइ मेंस में आकांक्षा के 40 में से 20 बच्चों का चयन होना अच्छा है। इस वर्ष आकांक्षा के लिए विद्यार्थियों के चयन की जिम्मेदारी जैक को दी गई थी। इसका रिजल्ट अभी नहीं आया है। जैक ने बताया कि इंजीनिय¨रग की तैयारी के लिए क्वाइलिफाइंग अंक 50 प्रतिशत से भी कम करने पर 46 बच्चों का चयन हो पा रहा है। इससे भी खराब स्थिति मेडिकल की है। यहां क्वाइलिफाइंग 35 प्रतिशत करने पर 40 बच्चे चयनित हो पा रहा है। जबकि इस परीक्षा में करीब 8000 बच्चे शामिल हुए थे। सचिव ने कहा कि ये सारे बच्चे मैट्रिक प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण थे। कई के अंक 80 प्रतिशत से अधिक थे। पढ़ाई में कांसेप्ट क्लियर कराएं तो ऐसी स्थिति नहीं होगी। सचिव ने कहा कि अगली बार से मैट्रिक परीक्षा समाप्त होने तुरंत बाद आकांक्षा की परीक्षा होगी।

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झारखंड के तीन स्कूलों का चयन

प्रधान सचिव जिला स्कूल में भी बच्चों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। इन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छता के पैमाने पर झारखंड से तीन स्कलों का चयन हुआ है। इसमें दो गिरिडीह जिला के दो कस्तूरबा स्कूल व एक स्कूल देवघर जिला का है। देशभर से 52 स्कूलों का चयन हुआ है। पूर्वोतर भारत के राज्यों में सिर्फ झारखंड से तीन स्कूल हैं। 14 राज्यों से एक भी स्कूल का चयन नहीं हुआ है। मौके पर प्राचार्य नरेंद्र कुमार सहित सभी शिक्षक थे।

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