रांची, राज्य ब्यूरो। कार्मिक सचिव केके खंडेलवाल के स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति को लेकर दिए गए आवेदन को मुख्यमंत्री रघुवर दास ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसमें उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर जाने की अनुमति मांगी थी। खंडेलवाल ने इंजीनियरिंग के छात्रों को पढ़ाने की इच्छा मन में आने के बाद वीआरएस के लिए आवेदन दिया था। यह आवेदन जून महीने के प्रथम सप्ताह (6 जून) में दिया गया था। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सीएम ने शुक्रवार को खंडेलवाल के आवेदन को स्वीकृति प्रदान की। आवेदन को तत्काल प्रभाव से स्वीकार नहीं करते हुए इसकी मियाद 31 दिसंबर 2018 रखी है।

सीएम फिलहाल एक सप्ताह के लिए चीन की यात्रा पर निकले हैं। उनके राची आने के पूर्व तीन महीने पूरे हो जाते। इस पर वीआरएस को लेकर उनका आवेदन स्वत: स्वीकृत माना जाता। सूत्र बताते हैं कि सरकार उन्हें वीआरएस लेने से रोकना भी चाहती थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका। वीआरएस के उनके आवेदन को स्वीकृति प्रदान करने की औपचारिक पुष्टि दो-तीन दिनों में हो जाएगी जब संबंधित फाइल मुख्यमंत्री सचिवालय से वापस मुख्य सचिव के पास लौटेगी। कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल के पास वाणिज्य कर विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार था।

इस पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य में जीएसटी लागू होने में महत्वपूर्ण भूमिका तो निभाई थी। इसमें गड़बड़ी करनेवाले एक दर्जन व्यापारियों पर मुकदमा करने का आदेश भी दिया था। अगले चार महीने तक खंडेलवाल झारखंड सरकार को अपनी सेवा देते रहेंगे। इस दौरान नए कार्मिक सचिव की तलाश भी कर ली जाएगी। सामान्य प्रक्त्रिया में खंडेलवाल 31 जुलाई 2022 को सेवानिवृत्त होते लेकिन चार वर्ष पूर्व ही उन्होंने नौकरी छोड़ने का निर्णय ले लिया। कार्मिक सचिव बनते ही उन्होंने काम को लेकर अपने नजदीकी लोगों के समक्ष अनिच्छा जता दी थी। अब तक दर्जनों आइएएस ले चुके हैं वीआरएस : झारखंड में हाल के वषरें में दर्जनों आइएएस अधिकारियों ने वीआरएस लिया है।

पूर्व मुख्य सचिव आरएस शर्मा वीआरएस लेने वालों में प्रमुख नाम रहे हैं। उन्होंने 2015 में वीआरएस लिया था। उनके अलावा तत्कालीन कैबिनेट सचिव जेबी तुबिद ने भी वीआरएस लिया था। ऐसा उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए किया था। चुनाव लड़ने के लिए राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी लंबोदर महतो भी वीआरएस ले चुके हैं। महतो और तुबिद को हार का मुंह देखना पड़ा था। इसके अलावा कल्याण विभाग के तत्कालीन विशेष सचिव संत कुमार वर्मा भी वीआरएस ले चुके हैं।

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