किसलय शानू, रांची : पुराने समय में तीर-धनुष का इस्तेमाल युद्ध में लड़ाई के लिए बना था। मगर, अब खूंटी जिला में ग्रामसभा समर्थक इसे पुलिस से लड़ाई करने में उपयोग कर रहे। पारंपरिक हथियार का इसे दर्जा देते हुए ग्रामसभा समर्थक अपने घरों में रखे हुए है। पथलगड़ी की समस्या के बाद से यहां लकड़ी की राइफल खूंटी जिले में बड़े पैमाने पर तैयार हो रहा है।

धनुष को हटा इसे अत्याधुनिक के तौर पर कर रहे है। पुलिस के हथियार को देख लकड़ी का राइफल बनाया जा है। लकड़ी के राइफल को भी कई प्रकार से बनाया है। लकड़ी के राइफल में गोली की जगह पर तीर का इस्तेमाल करते है।

दर्जनों लकड़ी का राइफल पुलिस ने की जब्त :

घाघरा गांव से पुलिस ने लकड़ी का दर्जनों राइफल जब्त की। पुलिस ने काफी संख्या में तीर भी बरामद किया है। इसके अलावा पुलिस ने डंडा, टांगी, बलुवा समेत कई पारंपरिक हथियार बरामद की। पुलिस ने पारंपरिक हथियार को जब्त करने अपने साथ ले आई।

धनुष से ज्यादा रफ्तार में लकड़ी के राइफल से निकला है तीर :

पुलिस की कार्रवाई के बाद घाघरा गांव से पुलिस ने कई ग्रामसभा समर्थक को पकड़ा। जिसमें बुधा हंस नामक एक ग्रामसभा ने बातचीत में लकड़ी के राइफल के बारे में कई बातें बताया। बुधा ने बताया कि धनुष से तीर ज्यादा रफ्तार में नहीं निकलती। मगर, जब तीर को लकड़ी के राइफल में लगाकर निशाना साधते है, तो इसकी रफ्तार तीन से चार गुणा बढ़ जाता है। दूर के लोगों पर अब निशाना साधने में आराम रहता है।

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