रांची, जेएनएन। कुछ साल पहले एक फिल्म आई थी मुन्ना भाई एमबीबीएस। फिल्म के मुख्य किरदार के रूप मे संजय दला ने सबको जादू की झप्पी का ज्ञान दिया था। उन्होने सफाई कर्मचारी को गले लगाकर यह संदेश किया था कि गले लगाकर किसी के दुख-दर्द को बांटना कितना आसान होता है। वेलेटाइन वीक का हग डे इन्ही बातो पर केद्रित है।

आज लगाते है गले आज के दिन लोग एक-दूसरे को गले लगाते है और किसी के प्रति अपना समर्पण और प्यार जाहिर करते है। अगर आपने किसी को गले लगाने का सुकून महसूस नही किया है, तो आज किसी अपने को गले लगाकर आप उनके प्रति अपना प्यार प्रकट कर सकते है। यूं तो वेलेटाइन वीक का हर रोज प्यार करने वालो के लिए खास है, पर अपने मित्र, भाई-बहन, माता-पिता आदि को भी गले लगा कर आप इस दिन को सेलिब्रेट कर सकते है। राजधानी मे युवाओ के बीच हग डे को ले कर काफी सामान्य सी प्रतिक्रिया है। उनका मानना है कि किसी को गले लगाने मे कोई परेशानी नही है, बल्कि इससे दोनो को काफी अच्छा महसूस होता है। दोस्तो से मिलने के क्रम मे वे एक-दूसरे को गले लगाते है और यह उनके लिए आम बात है। मनोवैज्ञानिक रूप से करता है प्रभावित हम सब ये मानते है कि गले लगाना मानवीय संवेदना से जुड़ा है, पर इसका एक वैज्ञानिक पहलू भी है। मनोचिकित्सक बताते है कि जब आप किसी को गले से लगाते है तो तो ना सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी आप उसके साथ होते है। यह सामने वाले को एक साइकोलोजिकल सपोर्ट देता है। कभी-कभी बिना दवा दिये भी केवल डॉक्टर से मिलने मात्र से मरीज ठीक हो जाता है, क्योकि उसे साइकोलॉजिकल सपोर्ट मिलता है। उसी प्रकार किसी को गले लगाकर भी उनकी कई समस्याओ को भी दूर कर सकते है। गुस्सा, स्ट्रेस, बीपी और तनाव गले लगाने से कम किए जा सकते है। हालांकि यह इलाज नही है। प्रतिक्रिया - गले लगाना किसी भी रोग का इलाज तो नही है, लेकिन साइकोलॉजिकल सपोर्ट की वजह से कोई इंसान अच्छा महसूस करता है। गले लगाने से किसी को परहेज नही होना चाहिए। - डॉ. अजय वाखला, मनो वैज्ञानिक।

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