रांची : योजनाओ के क्रियान्वयन और लाभुको के चयन मे आधार की अनिवार्यता ने झारखंड के 15.72 लाख परिवारो को हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया है। मनरेगा, छात्रवृलिा, जन वितरण प्रणाली, आवास निर्माण समेत विभिन्न लाभकारी योजनाओ मे आधार सीडिंग को लेकर चल रही मुहिम मे जहां 11.64 लाख राशन कार्ड रद कर दिए गए, वही लगभग तीन लाख पेशनभोगियो के नाम सूची से हटा दिए गए। और तो और मनरेगा मजदूरो के 1.08 लाख जॉब कार्ड तक रद कर दिए गए। यह सारी कार्रवाई चालू विलाीय वर्ष में की गई। हालांकि, योजनाओ के डिजिटलाइजेशन की इस प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा का खुलासा भी हुआ। इस क्रम मे हजारो ऐसे लाभुको का पता चला जो शौकिया तौर पर राशन कार्ड रखे हुए थे। इनका राशन कार्ड रद होने से नए लाभुको को सूचीबद्ध करने मे आसानी हुई। दूसरी ओर सक्षम होते हुए भी पेशन लेने वालो का भी पर्दाफाश हुआ। इससे इतर इसकी भेट हजारो जरूरतमंद लाभुक भी चढ़ गए। अफसरो द्वारा लाभुको का भौतिक सत्यापन नही किए जाने से वे सरकारी योजनाओ से वंचित हो गए। सरकारी योजनाओ मे आधार की अनिवार्यता की यह बानगी भर है कि राज्य की वर्तमान मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने स्वयं 27 मार्च 2017 को पत्र लिखकर अफसरो को चेताया था कि राशन कार्ड का आधार लिंक नही होने पर पांच अप्रैल के बाद संबंधित राशन कार्ड रद कर दिए जाएं। नतीजा यह हुआ कि 100 फीसद आधार सीडिंग का लक्ष्य हासिल करने मे 11.64 लाख राशन कार्ड रद कर दिए गए। खाद्य आपूर्ति विभाग ने सात सितंबर 2017 को यह खुद स्वीकारा था कि विभाग के इस प्रयास से सरकार को 225 करोड़ रुपये की बचत हुई है। इसी तरह महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग ने आधार के जरिए तीन लाख फर्जी पेशन खातो को रद करने से 180 करोड़ रुपये की बचत की बात स्वीकारी थी। संतोषी की मौत के बाद हरकत मे आई सरकार, अबतक पांच मौते आधार की अनिवार्यता के कारण हो रही परेशानी का खुलासा तब हुआ जब सिमडेगा की 11 वर्षीय संतोषी की मौत हो गई। सामाजिक संगठनो ने इसे जहां भूख से हुई मौत का दावा किया, वही सरकार ने इसकी वजह बीमारी बताई। बात चाहे जो भी हो संतोषी कुमारी की मौत के मामले मे खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के मंत्री सरयू राय ने खुद स्वीकारा था कि गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर कर रही संतोषी के परिवार को लगभग चार महीने से राशन नही मिल पाया था। इसी तरह देवघर के रूपलाल मांझी के परिवार को दो महीने से राशन इसलिए नही मिला था क्योकि ई-पोस मशीन ने उनके अंगूठे के निशान को नही स्वीकारा था। गढ़वा की इतवारिया देवी को जहां तीन महीने से राशन नही मिला था, वही दो महीने से पेशन बंद थी। गढ़वा की ही प्रेमनी कुवर के परिवार को भी पिछले कई महीने से राशन और पेशन नही मिल रहा था। हालिया घटना मे पाकुड़ के हिरणपुर प्रखंड की 30 वर्षीय लुखी मुर्मू की मौत कुपोषण की वजह से हो गई। 12.6 फीसद जॉबकार्डधारी फर्जी निकले ग्रामीण विकास मंत्रालय की नौ अप्रैल 2017 की रिपोर्ट के अनुसार आधार सीडिंग नही होने की वजह से पूरे देश मे 93 लाख जॉब कार्ड रद कर दिए गए। इनमे झारखड के भी एक लाख आठ हजार जॉब कार्डधारी शामिल थे। समीक्षा के बाद यह स्पष्ट हुआ कि इनमे से 12.6 फीसद जॉब कार्डधारी ही फर्जी थे, शेष के जॉबकार्ड अन्य कारणो से रद किए गए, इनमे आधार के अधिकतर मामले थे। जनवरी से दिसंबर के बीच घटी कई घटनाएं जनवरी से दिसंबर 2017 के बीच सरकार के स्तर से आधार की अनिवार्यता से संबंधित कई ऐसे पत्राचार/घोषणाएं हुई, जिससे आम जनता की बुनियादी हको का उल्लंघन हुआ। पूर्वी सिंहभूम जिले के बोराम प्रखंड के बीडीओ ने पत्र लिखकर यह खुलासा किया था कि बिना सूचना के छह हजार मनरेगा मजदूरो का खाता खोला गया था। पारिश्रमिक की निकासी के लिए आधार की अनिवार्यता होने से माइक्रो एटीएम से मजदूरी भुगतान मुश्किल हो गया था। लातेहार स्थित मनिका प्रखंड के बिशुबांध के कई ऐसे परिवारो का राशन कार्ड रद कर दिया गया, जिन्हे राशन की अत्यंत आवश्यकता थी। इससे इतर सरकार ने उन परिवारो को फर्जी राशनकार्डधारियो में इसलिए सूचीबद्ध कर दिया, क्योकि उनका राशन कार्ड आधार से लिंक नही था। मणिका प्रखड मे ही मनरेगा के तहत छह लाख रुपये का भुगतान इसलिए रोक दिया गया, क्योकि आधार नही रहने की वजह से लाभुको का सत्यापन नही हो सका। केद्र के निर्देश को दरकिनार करती रही सरकार उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक मंत्रालय ने आठ फरवरी 2017 को ही अधिसूचना जारी कर खाद्य सुरक्षा कानून 2013 का हवाला देते हुए आधार के संबंध मे अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी थी। आधार से लिंक नही होने पर भी वोटर आईडी, फोटोयुक्त बैक पासबुक, पैन कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेस, गजटेड अफसर द्वारा जारी जारी फोटो पहचान पत्र, किसान फोटो पासबुक के अलावा राज्य सरकार द्वारा जारी अन्य दस्तावेज के आधार पर राशन देने को कहा था।

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