राज्य ब्यूरो, रांची। केंद्रीय बजट झारखंड जैसे छोटे राज्यों के विकास को गति देने में सहायक होगा। आधारभूत संरचना के साथ-साथ लोगों के जीवन स्तर उठाने में भी यह मददगार साबित होगा। बजट में विशेष रूप से झारखंड के लिए भले ही कोई घोषणा न की गई हो, लेकिन जिस तबके को ध्यान में रखकर बजट का तानाबाना बुना गया है उसकी आबादी झारखंड में 70 प्रतिशत से अधिक है। यह बजट उस आबादी के विकास में सहायक होगा। हालांकि, सिर्फ बजट घोषणा से कुछ नहीं होगा, जरूरत तेजी से केंद्रीय योजनाओं पर काम करने की भी है।

कृषि, ग्रामीण विकास, शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं के विकास पर बजट में बड़ा प्रावधान किया गया है। इन सभी क्षेत्रों में झारखंड पिछड़ा है। केंद्रीय बजट में किए गए प्रावधान निश्चित तौर पर इन क्षेत्रों के विकास में सहायक होंगे। 50 करोड़ आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को पांच लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा देने का निर्णय एेतिहासिक है। झारखंड को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि, राज्य सरकार ने स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की शुरुआत की है। दो लाख रुपये तक की इस बीमा योजना से राज्य की 80 फीसद आबादी को जोड़ने का निर्णय लिया गया है।

 

केंद्र की अब इस नई योजना से अब राज्य की योजना का केंद्रीय योजना में समायोजन हो सकेगा इससे न केवल राज्य के खजाने की बचत होगी बल्कि गरीबों के इलाज का दायरा भी 2 लाख से 5 लाख रुपये तक बढ़ेगा। केंद्र सरकार ने सभी जिलों में स्किल सेंटर खोलने की येाजना बजट में की है। इससे झारखंड में भी कौशल विकास मिशन के लक्ष्य को साधना आसान होगा। उज्जवला योजनां जारी रखी गई है। किसानों को उनकी फसल की लागत के मूल्य का डेढ़ गुना देने की घोषणा और सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की घोषणा सीधे तौर पर राज्य के किसानों से जुड़ी हैं। झारखंड के किसान भी इससे लाभांवित होंगे। 600 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण में निश्चित तौर पर झारखंड के कुछ स्टेशन संवरेंगे। 

बजट : भारत के निर्माण में मील का पत्थर : रघुवर

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने केंद्रीय बजट पर कहा है कि यह बजट भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा। यह गांवों, गरीबों और किसानों के सर्वागीण विकास को समर्पित बजट है। उन्होंने राज्य की जनता की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बजट के लिए आभार प्रकट किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस बजट से किसानों की आमदनी बढ़ेगी। कृषि उत्पादों के लिए स्टोरेज, प्रोसेसिंग, मार्केटिंग के लिए योजना विकसित करने का कदम अत्यंत सराहनीय है। गोव‌र्द्धन योजना भी गांव को स्वच्छ रखने के साथ-साथ किसानों की आमदनी बढ़ाने में मदद करेगी।

2022 तक हर गरीब को घर देने के लक्ष्य को लेकर शहरी क्षेत्रों में भी 37 लाख मकान बनाने की मंजूरी दी गई है। बजट में महिलाओं को होम मेकर्स से नेशन मेकर्स के रूप में परिवर्तित करने का संकल्प दिख रहा है। 'ईज ऑफ लिविंग' की भावना का विस्तार उज्ज्वला योजना में है। यह योजना देश की गरीब महिलाओं को न सिर्फ धुएं से मुक्ति दिला रही है बल्कि उनके सशक्तिकरण का भी बड़ा माध्यम बनी है। इसके लक्ष्य को 5 करोड़ परिवार से बढ़ाकर 8 करोड़ कर दिया गया है। महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप के लिए इस बजट में 75 हजार करोड़ रुपये की राशि रखी गई है। झारखंड में सखी मंडल को इसका लाभ मिलेगा। बजट में प्रस्तुत की गई नई स्वास्थ्य योजना 'आयुष्मान भारत' गरीबों को स्वास्थ्य संबंधित चिंता से मुक्त करेगी। सरकारी खर्चे पर शुरू की गई यह सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना है। देश की सभी बड़ी पंचायतों में हेल्थ वेलनेस सेंटर की स्थापना भी स्वास्थ्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत रोड कनेक्टिविटी पर फोकस किया गया है। अब राज्य के ग्रामीण एवं सुदूरवर्ती क्षेत्रों की सड़कों को स्कूल, अस्पताल, ग्रामीण हाट-बाजार एवं उच्च शिक्षा केंद्रों से जोड़ने का काम किया जाएगा। युवाओं के लिए संगठित क्षेत्र में 70 लाख नई नौकरियां सृजित होंगी। सरकार का ध्यान स्वरोजगार पर भी है। यह बजट आदिवासियों, अनुसूचित जाति/जनजातियों के विकास के लिए भी अहम है। ऐसे प्रखंड जहां आदिवासियों की आबादी 50 फीसद से अधिक होगी वहां एकलव्य स्कूलों की स्थापना की जाएगी। ये स्कूल नवोदय की तर्ज पर आवासीय विद्यालय होंगे। इससे इस समाज के बच्चों की शिक्षा की स्थिति सुधरेगी।

यह पाकेटमार बजट है : हेमंत सोरेन

झारखंड मुक्ति मोर्चा ने आम बजट को निराशाजनक करार दिया है। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने इसे पाकेटमार बजट बताते हुए कहा कि वित्तमंत्री अरुण जेटली 2022 तक सबकुछ ठीक होने का दावा कर रहे हैं लेकिन 2019 के चुनाव में जनता ही इन्हें ठीक कर देगी। बजट में केंद्र सरकार ने अपनी चार साल की विफलताओं को स्वीकारा है। वित्तमंत्री अरुण जेटली स्वीकार कर रहे हैं कि किसानों की हालत खराब है। देश में शिक्षा की गुणवत्ता निम्न है।

गरीबों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मयस्सर नहीं हैं। किसानों को उनकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है। बेरोजगारी सबसे बड़ी समस्या के रूप में अभी भी खड़ी है। आम बजट में टैक्स में कोई राहत नहीं दी गई है। इससे इतर टैक्स पर लगने वाले सेस में एक प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। नौकरी पेशा एवं कमजोर आय वर्ग के लिए कोई राहत नहीं है। बिजनेस घरानों के लिए कारपोरेट टैक्स में पांच प्रतिशत की छूट के साथ सात हजार करोड़ का लाभ दिया गया है।

उन्होंने वित्तमंत्री पर गलतबयानी का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को रबी फसल की लागत का डेढ़ गुना मिलता है। अभी गेहूं का समर्थन मूल्य 1625 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास है लेकिन लागत आयोग एवं एफसीआइ का आंकड़ा कहता है कि लागत मूल्य लगभग 2408 क्विंटल है। केंद्र सरकार लोगों से झूठ बोलते-बोलते सदन में भी झूठ बोल रही है। चार साल में एक भी स्मार्ट सिटी नहीं बनी लेकिन इनका दावा है कि अगले कुछ साल में 99 स्मार्ट सिटी बना देंगे। 

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