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मनमानी स्कूल फीस और धर्मांतरण पर सरकार ने कसा शिकंजा

Publish Date:Wed, 06 Dec 2017 11:12 AM (IST) | Updated Date:Wed, 06 Dec 2017 11:12 AM (IST)
मनमानी स्कूल फीस और धर्मांतरण पर सरकार ने कसा शिकंजामनमानी स्कूल फीस और धर्मांतरण पर सरकार ने कसा शिकंजा
इसके साथ ही राज्य में 30 नए कॉलेजों के लिए 871 पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई है। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी शिक्षा मंत्री डॉ. नीरा यादव ने दी।

रांची, राज्य ब्यूरो। राज्य के निजी स्कूलों पर अब सरकारी शिकंजा कसेगा। राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम के प्रस्ताव पर सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत नौ सदस्यीय एक समिति होगी जो किसी भी प्रकार की फीस बढ़ोतरी पर अपना फैसला देगी। समिति में फैसला नहीं होने पर उपायुक्त की अध्यक्षता में जिलास्तरीय समिति निर्णय ले सकेगी। स्कूल स्तरीय फीस समिति

में चार अभिभावकों को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। 

 

एक अन्य अहम फैसले में जिला उपायुक्तों को अधिकार दिया गया कि वे धार्मिक संस्थाओं का निरीक्षण कर सकेंगे। धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू होने के बाद अब जिलों में धर्म परिवर्तन करने के पूर्व और बाद में उपायुक्त को सूचित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही राज्य में 30 नए कॉलेजों के लिए 871 पदों के सृजन को स्वीकृति प्रदान की गई है। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी शिक्षा मंत्री डॉ. नीरा यादव ने दी।

 

राज्य सरकार ने पुलिस को सशक्त करने पर भी पूरा बल दिया है। 15 अनुमंडल थानों, छह साइबर थानों के साथ-साथ कई नए परिवर्तन किए हैं।  रांची के एयरपोर्ट और खेलगांव में भी नए थाने होंगे। बैठक के दौरान कुल 28 प्रस्ताव स्वीकृत किए गए। 

 

झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण संशोधन अधिनियम की खास बात 

-सभी निजी विद्यालयों में फीस समिति होगी जिसमें 9 सदस्य होंगे। 

-निजी विद्यालय में प्रबंधन द्वारा मनोनीत प्रतिनिधि इस समिति के अध्यक्ष होंगे।

-निजी विद्यालय के प्राचार्य इस समिति के सचिव होंगे।

-निजी विद्यालय के प्रबंधन द्वारा मनोनीत तीन शिक्षक इस समिति के सदस्य होंगे।

-माता-पिता शिक्षक संघ द्वारा नामित चार माता/पिता इसके सदस्य होंगे।

-समिति का कार्यकाल तीन शैक्षणिक वर्षों के लिए होगा और कोई भीअभिभावक सदस्य समिति के सदस्य के रूप में पुन: मनोनयन के लिए पात्र नहीं होंगे।

-निजी विद्यालय का प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए फीस का प्रस्ताव देने में सक्षम होगा।

-समिति के अध्यक्ष एक सप्ताह पूर्व बैठक को लेकर सदस्यों को सूचित करेंगे।

 

शुल्क निर्धारण का कारण

-विद्यालय की अवस्थिति

-गुणात्मक शिक्षा के लिए छात्रों को उपलब्ध कराई गई संरचनाएं

-प्रशासन और रखरखाव पर व्यय

-मापदंडों के अनुसार अहर्तित शिक्षक और शिक्षकेतर कर्मचारी तथा उनके वेतन घटक

-वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए युक्तियुक्त राशि

-विद्यालय में कुल आय से छात्रों पर व्यय

-शिक्षा के विकास और विद्यालय के विस्तार के लिए आवश्यक राजस्व।

-अधिनियम के निर्धारित कारकों पर विचार करने के बाद शुल्क समिति प्रस्तावित शुल्क संरचना की तारीख से 30 दिनों के अंदर लिखित रूप से प्रस्ताव पर स्वीकृति देगी।

-समिति विभिन्न शीर्र्षों को बताएगी जिसके तहत शुल्क लगाया गया है।  

 

धर्म स्वातंत्र्य नियमावली की बातें

-धर्मांतरण के पूर्व सूचना और पूर्वानुमति

ऐसा कोई धार्मिक पुजारी जो किसी व्यक्ति को एक धर्म से दूसरे में धर्र्मांतरित करता है तो वह दंडाधिकारी से 15 दिन पूर्व अनुमति लेगा

-ऐसे सभी नोटिस को एक रजिस्टर में दर्ज किया जा सकेगा

-एक धर्म से दूसरे में शामिल व्यक्ति फॉर्म सी से उस जिला दंडाधिकारी को सूचित करेगा जहां धर्र्मांतरण हुआ है।

-डीसी कार्यालय में धार्मिक संगठनों और संस्थानों की सूची तैयार रहेगी। इस सूची में जिले में धार्मिक प्रचार लगे लोगों की भी सूची होगी।

-डीसी धार्मिक संगठनों से लाभ पानेवाले लोगों की सूची मांग सकता है।

-डीसी बल अथवा छल से धर्मांतरण की जांच करा सकता है।

-जिलाधिकारी बिना सूचना के धर्मांतरण के विरुद्ध कार्रवाई कर सकता है।

-जांच में धर्मांतरण में बल अथवा छल की बात सामने आती है तो पुलिस को जांच का आदेश डीसी दे सकता है।

-पुलिस निरीक्षक से छोटे पदाधिकारी ऐसे मामलों की जांच नहीं कर सकेंगे।

-अधिकारी 60 दिनों के भीतर चार्जशीट दायर करेगा। 

 

डीसी को अभिलेखों के निरीक्षण की शक्ति, पीडि़तों को 2 लाख धार्मिक संस्थानों और संगठनों के अभिलेखों का निरीक्षण करने के लिए जिला दंडाधिकारी को शक्ति प्रदान की गई है। अगर यह सत्यापित होता है कि कानून के बावजूद किसी व्यक्ति का धर्र्मांतरण गलत तरीके से कराया गया तो उसे पीडि़त मानते हुए 2 लाख रुपये का मुआवजा सरकार देगी।

 

ऐसी होगी जिला की समिति 

-उपायुक्त - अध्यक्ष

-जिला शिक्षा पदाधिकारी - पदेन

सदस्य सचिव (उच्च विद्यालयों के लिए)

-जिला शिक्षा अधीक्षक - पदेन सदस्य

सचिव (प्राथमिक विद्यालयों के लिए)

-जिला परिवहन पदाधिकारी - सदस्य

-अध्यक्ष द्वारा नामित एक चार्टर्ड एकाउंटेंट - सदस्य

-अध्यक्ष द्वारा नामित दो निजी विद्यालय

के प्राचार्य - सदस्य

-दो माता-पिता - सदस्य

 

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Web Title:Jharkhand cabinet approves draft bill to regulate fees in private schools(Hindi news from Dainik Jagran, newsnational Desk)

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