राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार की नीतियों को जनविरोधी और दमनकारी करार देते हुए  झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) ने सरकार के खिलाफ जंग का एलान किया है। जंग की शुरुआत 'अधिकार एवं न्याय के लिए संघर्ष यात्रा' से होगी। एक नवंबर से संताल परगना के देवघर स्थित करौं प्रखंड से शुरू होने वाली यह यात्रा पांच चरणों में पूरे राज्य से होकर गुजरेगी। माना जा रहा है कि यह यात्रा पिछले विधानसभा चुनाव से शुरू हुए झाविमो में बिखराव की स्थिति को पाटने तथा जनाधार बढ़ाने की कोशिश को केंद्र में रखकर होगी।

गोड्डा में प्रस्तावित अडाणी पावर प्लांट के विरोध में ग्रामीणों को उकसाने के आरोप में छह महीने जेल की सजा काटकर आए पार्टी के प्रधान महासचिव प्रदीप यादव इसकी कमान संभालेंगे। इस यात्रा के जरिए झाविमो जहां सत्ता पक्ष की नाकामियां गिनाएगा, वहीं झाविमो के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए छह विधायकों की कहानी दोहराएगा। 2019 के चुनाव को केंद्र में रखकर शुरू हो रही प्रथम चरण की यह यात्रा एक नवंबर से शुरू होकर छह नवंबर तक चलेगी।

झाविमो की योजना इस अवधि में छोटी-बड़ी 16 सभाओं के जरिए सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट में छेड़छाड़ की कोशिश, भूमि अधिग्रहण कानून से सामाजिक प्रभावों के मूल्यांकन को हटाने का प्रयास तथा धर्म स्वतंत्र विधेयक आदि के खिलाफ लोगों को गोलबंद करेगा। दूसरे चरण की यात्रा चतरा से शुरू होकर पलामू पहुंचकर खत्म होगी। आगे की यात्रा की घोषणा झाविमो इसके बाद करेगा।

बहरहाल, करौं के अलावा जामताड़ा के करमाटांड़ और फतेहपुर, दुमका के जामा, काठीकुंड और शिकारीपाड़ा, पाकुड़ के अमरापाड़ा और लिट्टीपाड़ा, साहिबगंज के उधवा और तालझारी, जबकि छह नवंबर को साहिबगंज के महादेवगंज और भगैया तथा गोड्डा के महगामा और बसंतराय से होकर गुजरने वाली प्रथम चरण की इस यात्रा का झाविमो को क्या फलाफल मिलेगा, यह भविष्य के गर्भ में है। इससे इतर जन समस्याओं को लेकर सशक्तविपक्ष की भूमिका में सदन में जोरदार ढंग से अपनी आवाज बुलंद करने के लिए शुमार प्रदीप यादव से झाविमो ने खासी उम्मीद पाल रखी है।

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