रांची, जेएनएन। विपक्षी एकता झारखंड में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक पैतरेबाजी के बीच विपक्ष अपना कुनबा मजबूत करने में जुट गया है। झारखंड सरकार की नीतियों को जन विरोधी और दमनकारी करार देते हुए विपक्षी दलों ने भाजपा को चौतरफा घेरने की संयुक्त रणनीति बनाई है।

इस मसले पर कांग्रेस, झाविमो, राजद, जदयू, समाजवादी पार्टी, वामदलों के अलावा आदिवासियों- मूलवासियों के लगभग दर्जन भर संगठन अब एक हो गए हैं। तय हुआ कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम में संशोधन के प्रयास, भूमि अधिग्रहण कानून-2013 से सामाजिक प्रभाव के मूल्यांकन वाले तथ्य को हटाने, धर्म स्वतंत्र विधेयक, स्थानीय और नियोजन नीति को लेकर सरकार की हुई किरकिरी उनके आंदोलन का मूल हथियार होगा। यह सब वर्ष-2019 के चुनाव को केंद्र में रखकर होगा।ॉ

भाजपा को शिकस्त देने के लिए विपक्ष किसी भी हद तक जाएगा, ऐसा संकल्प लिया गया है। धरना, प्रदर्शन, रैली, सेमिनार, सत्याग्रह आदि माध्यमों से विपक्ष सत्ता पक्ष के खिलाफ लोगों को गोलबंद करने की जुगत में है। फिलहाल विपक्षी एका की कमान झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी, वरिष्ठ कांग्रेसी सह पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री सुबोधकांत सहाय सरीखे नेताओं ने संभाल रखी है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव भी अपने-अपने स्तर से विपक्षी एका को हवा दे रहे हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की चुप्पी

झारखंड के सिमडेगा जिले में हुई आदिवासी बच्ची की मौत को लेकर भाजपा और विपक्ष में जुबानी जंग जारी है। विपक्ष जहां एकजुट होकर बच्ची की मौत का कारण भूख को बता रहा है, वहीं प्रदेश भाजपा, सरकार के सुर में सुर मिलाते हुए मौत की वजह बीमारी करार दे रही है। दोनों ओर से हमले जारी हैं। बयानबाजी और प्रेस कांफ्रेंस का दौर भी चरम पर है। लेकिन पूरे प्रकरण पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मण गिलुवा कुछ खास सक्रिय नहीं दिख रहे हैं।

भाजपा में अब तक की परंपरा रही है कि किसी बड़ी घटना के होने पर प्रदेश अध्यक्ष स्वयं पार्टी की ओर से एक टीम का गठन कर उसे घटनास्थल पर भेजते हैं और उसकी रिपोर्ट भी मांगी जाती है। लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। प्रदेश अध्यक्ष ने ऐसी कोई टीम गठित नहीं की। हां, स्थानीय स्तर पर कुछ भाजपा नेता पीडि़त परिवार के घर जरूर गए। चर्चा यह भी है कि प्रदेश अध्यक्ष वोट बैंक को देखते हुए इस मामले से दूरी बना रहे हैं।

रत्नगर्भा झारखंड में माइनिंग शो

खनिज संपदा से भरपूर झारखंड में पहली बार मिनरल सेक्टर को प्रमोट करने के लिए 'झारखंड माइनिंग शो' का आयोजन किया जा रहा है। 30 अक्टूबर से एक नवंबर के बीच प्रस्तावित इस तीन दिवसीय माइनिंग शो में देश की तमाम नामी गिरामी कंपनियां अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगी। मिनरल शो का उद्देश्य इस क्षेत्र से जुड़े विभिन्न सेक्टर में निवेश की संभावनाओं को तलाशने और इससे जुड़े उद्योगों का जाल बिछाने की मंशा से किया गया है। मोमेंटम झारखंड का आयोजन कर निवेश को धरातल पर उतारने में जुटी राज्य सरकार का इस विशेष सेक्टर पर फोकस करना अच्छी सोच को दर्शा रहा है।

पहली बार इस वृहद शो के माध्यम से राज्य की खनिज संपदा की मार्केटिंग के साथ-साथ माइनिंग के दौरान पर्यावरण की रक्षा और सुरक्षा पर भी मंथन किया जाएगा। तीन दिनों के दौरान आधा दर्जन से अधिक तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे। हाल ही में चेक गणराज्य और जापान दौरे से वापस लौटे मुख्यमंत्री रघुवर दास ने तत्काल इस शो का आयोजन कर उद्योगों के विकास की दिशा में सकारात्मक सोच को दर्शाया है। माइनिंग शो का आयोजन झारखंड सरकार और सीआइआइ के संयुक्त तत्वावधान में किया जा रहा है। टाटा स्टील, सेल, कोल इंडिया और एनटीपीसी भी इस शो के सहभागी बनेंगे। 

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