राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार की नीतियों को जन विरोधी और दमनकारी करार देते हुए विपक्षी दलों ने भाजपा को चौतरफा घेरने की रणनीति बनाई है। सोमवार को रांची में कांग्रेस, झाविमो, राजद, जदयू, समाजवादी पार्टी, वामदलों के अलावा आदिवासियों-मूलवासियों के लगभग दर्जन भर संगठनों की संयुक्त बैठक में सर्वसम्मति से यह राय बनी।

तय हुआ कि 2019 के चुनाव में भाजपा को धूल चटाने के निमित तमाम विपक्षी दलों की समन्वय समिति बनेगी। यह समिति धरना, प्रदर्शन, रैली, सेमिनार, सत्याग्रह आदि माध्यमों से जनचेतना फैलाएगी। नेताओं ने इस बीच सीएनटी में संशोधन के प्रयास, भूमि अधिग्रहण कानून 2013 से सामाजिक प्रभाव के मूल्यांकन वाले तथ्य को हटाने, धर्म स्वतंत्र विधेयक लाने की सरकार की कार्रवाई की जमकर आलोचना की।

नेताओं ने कहा कि स्थानीय और नियोजन नीति को लेकर जहां राज्य के नौजवानों में नाराजगी है, वहीं धर्म स्वतंत्र विधेयक के माध्यम से सरकार ने लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन किया है। नेताओं ने कहा कि जाति प्रमाणपत्र में धर्म लिखने की परंपरा है। इससे इतर आदिवासी न तो ¨हदू हैं, न मुस्लिम, न सिख और न ही इसाई, ऐसे में आदिवासी क्या लिखें। सरकार को बताना चाहिए कि वह सरना कोड के मामले में क्यों मौन है।

वरिष्ठ कांग्रेसी सुबोधकांत सहाय तथा झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि विपक्ष की समन्वय समिति और कोर कमेटी द्वारा लिए गए फैसले सर्वमान्य होंगे। जनमुद्दों को लेकर संयुक्त आंदोलन होगा। इससे इतर पार्टी स्तर पर होने वाले कार्यक्रम पूर्ववत जारी रहेंगे। 2019 के चुनाव में झारखंड में भाजपा को दफनाने के संकल्प के साथ समन्वय समिति आगे बढ़ेगी।

कांग्रेस नेता फुरकान अंसारी ने कहा कि हाल की घटनाओं और सरकार के कृत्यों को लेकर जनता की मानसिकता भाजपा के खिलाफ है। शिक्षाविद करमा उरांव ने कहा कि जनता परिवर्तन चाहती है। पूर्व सांसद भुवनेश्र्वर मेहता, झाविमो के प्रधान महासचिव प्रदीप यादव, सीपीएम के गोपीकांत बख्शी, जदयू के रामस्वरूप, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष राजीव रंजन, आदिवासी मूलवासी मंच के राजू महतो, जसरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की, बुद्धिजीवी मंच के प्रेमचंद मुर्मू, झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा के प्रेम शाही मुंडा, सदान विकास परिषद के हिमांशु राय आदि ने भी अपने विचार रखे।

केस वापस नहीं हुआ तो गिरफ्तारी : बाबूलाल

झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जनविरोध के कारण सरकार ने सीएनटी एक्ट में संशोधन तो वापस ले लिया, परंतु इसके खिलाफ आंदोलन करने वालों पर से उसने अबतक मुकदमा वापस नहीं लिया है। अगर सरकार शीघ्र केस वापस नहीं लेती है तो पूरा विपक्ष गिरफ्तारी देगा। प्रदेश राजद अध्यक्ष गौतम सागर राणा ने कहा कि सरकार के प्रति जनता में जबर्दस्त आक्रोश है। 2019 में भाजपा को जमींदोज करने की हर रणनीति पर काम होगा। 

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