रांची : अमर शहीद शेख भिखारी के शहादत दिवस पर आठ जनवरी बुधवार को राज्य की जनता उन्हें श्रद्धा और सम्मान देगी। इस अवसर पर हरेक वर्ष की भांति इस वर्ष भी एचइसी शहीद मैदान स्थित अमर शहीद शेख भिखारी मीनार चौक सेक्टर थ्री में, अमर शहीद शेख भिखारी और शहीद टिकैत उमरांव सिंह का स्मरणोत्सव कार्यक्रम सुबह नौ बजे होगा। इसके मुख्य अतिथि वरीय अधिवक्ता व रांची अंजुमन इस्लामिया पूर्व अध्यक्ष गुलाम मुस्तफा होंगे।

शाम सात बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा, जिसके मुख्य अतिथि पूर्व उप मुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो होंगे। जबकि कार्यक्रम का उद्घाटन चंद्रप्रकाश चौधरी करेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि आठ बजे से आरंभ होगा, जो सुबह छह बजे तक चलेगा। इसमें मुंबई के अशोक जख्मी और इम्तियाज भारती के बीच शानदार कव्वाली का मुकाबला होगा।

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कौन थे शेख भिखारी :

अमर शहीद शेख भिखारी का नाम छोटानागपुर के इतिहास में सुनहले अक्षरों में लिखा गया है। 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में इस महान योद्धा और ओजस्वी सेनापति ने बड़ी वीरता और साहस के साथ अंग्रेजों के दांत खट्टे किये थे। कहा जाता है कि उनकी तलवार में इतनी ताकत थी कि अंग्रेज कमिश्नर मैकडोनाल्ड ने इसका गजट में जिक्र किया था और उन्हें 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में खतरनाक बागी करार दिया गया था।

शेख भिखारी ओरमांझी खोदिया के राजा टिकैत उमराव सिंह जी के दीवान और कुशल सेनापति भी थे। उनका जन्म बुढ़मू के मक्का होप्टे में 1819 में एक बुनकर अंसारी परिवार में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपना पूरा जीवन ओरमांझी, खोदिया में बिताया। शेख भिखारी को छह जनवरी 1858 में अंग्रेजों ने छल बल के साथ चुटूपालू के निकट भीषण लड़ाई के बाद गिरफ्तार कर लिया और सात जनवरी को उनपर मुकदमा चला। इस दौरान उनकी वीरता और साहस से भयभीत अंग्रेजों ने अदालती कारवाई पूरे किये बिना टिकैत उमराव सिंह के साथ उन्हें बरगद के पेड़ पर फांसी दे दी। यह पेड़ आज भी चुटूपालू घाटी में प्रेरणा स्थल के रूप में मौजूद है। आठ जनवरी को झारखंड वासी उन्हें याद कर श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।

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