रांची : राज्य में मानवाधिकार का संरक्षण एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। झारखंड ह्यूमन राइट्स मूवमेंट ने कहा है कि यहां 57 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। वहीं, समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों में यह संख्या 5.5 लाख है। राइट्स मूवमेंट के अनुसार 78.2 प्रतिशत किशोरियां और 70 प्रतिशत महिलाएं एनिमिक हैं। इनमें आदिवासी समुदाय के पांच वर्ष से कम वर्ष के 80 प्रतिशत बच्चे और 85 प्रतिशत महिलाएं हैं। वहीं लुप्तप्राय जनजाति के 40 लोग कुपोषण से मौत के शिकार हो गए हैं। इसके अलावा राज्य में प्रतिवर्ष 360 मादा भ्रूण की हत्या कर दी जाती है।

बाल मजदूरी भी मानवाधिकार हनन का बड़ा कारण बन रही है। काम की तलाश में प्रतिवर्ष एक लाख 25 हजार पलायन करने वालों में बाल मजदूर के रूप में 33 हजार लड़कियां होती हैं। इंडियन पीपुल्स ट्रिब्यूनल ऑन इनवॉयरमेंट एंड ह्यूमन राईट्स के अनुसार झारखंड में विकास के नाम पर अब तक 65.40 लाख लोग विस्थापन के शिकार हो चुके हैं।

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आज जगह-जगह कार्यक्रम

रांची : संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से घोषित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस पूरे विश्व में 10 दिसंबर को मनाया जाएगा। साथ ही महिला हिंसा प्रतिरोध पखवाड़ा के समापन के रूप में मनाया जाएगा। कई जगहों पर मानवाधिकार विषय के साथ सम्मेलन व सेमिनार होंगे तो महिला संगठनों की ओर से मानव श्रृंखला का निर्माण कर महिला हिंसा प्रतिरोध का आह्वान किया जाएगा।

इस विशेष मौके पर झारखंड ह्यूमन राइट्स मूवमेंट और अन्य संगठनों ने मानवीय सम्मान के साथ जीवन को सुनिश्चित करने की अपील की है। साथ ही झारखंड में विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे मानवाधिकार हनन पर अपनी रिपोर्ट भी जारी की है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग का कहना है कि राज्य में मानवाधिकार की स्थिति काफी दयनीय है। भूख से मौत, दुष्कर्म, पुलिस व न्यायिक हिरासत में मौत, फर्जी मुठभेड़ में हत्या, झूठे मुकदमों आदि का अंबार है। भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र की संधि, सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश और मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 को भी ताक पर रख दिया गया। इस पर सभी को जागरूक होने की जरूरत है।

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एक दशक में महिला हिंसा

महिला हिंसा - दर्ज मामले

दुष्कर्म 7,563

अपहरण 3,854

दहेज हत्या 2,707

दहेज प्रताड़ना 3,398

छेड़खानी 3,384

यौन उत्पीड़न 230

ह्यूमन ट्रैफिकिंग 136

डायन हत्या 1,157

छूआछूत 194

अत्याचार 652

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