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रामगढ़ में गांव की महिलाएं AI सीखकर बनेंगी आत्मनिर्भर, टाटा स्टील की पहल

Published: Thu, 26 Feb 2026 01:59 PM (GMT+05:30)

टाटा स्टील और टाटा स्टील फाउंडेशन ने 'एआई सखी इमर्शन' कार्यक्रम के तहत 600 से अधिक ग्रामीण महिलाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ा। इस कार्यक्रम से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा।

एआई सखी कार्यक्रम में वेस्ट बोकारो क्षेत्र की महिलाएं। (जागरण)

एआई सखी कार्यक्रम में वेस्ट बोकारो क्षेत्र की महिलाएं। (जागरण)

HighLights

  1. 600+ ग्रामीण महिलाओं को एआई सखी कार्यक्रम से जोड़ा।

  2. एआई टूल्स से उद्यमिता, डिजिटल मार्केटिंग और साइबर सुरक्षा सीखी।

  3. महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा, कारोबार विस्तार की नई राहें खुलीं।

संवाद सूत्र, वेस्ट बोकारो (रामगढ़)। गांवों की महिलाओं को डिजिटल दुनिया से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत टाटा स्टील और उसकी सामाजिक इकाई टाटा स्टील फाउंडेशन ने अपने परिचालन क्षेत्रों की 600 से अधिक महिलाओं को एआई सखी इमर्शन कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर दिया।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को यह समझाना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) केवल बड़े शहरों या कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांवों में आजीविका, उद्यमिता और दैनिक जीवन की समस्याओं के समाधान में भी अहम भूमिका निभा सकता है।

वेस्ट बोकारो क्षेत्र से 15 महिलाएं इस बड़े समूह का हिस्सा बनीं। इमर्सिव कार्यशाला के दौरान प्रशिक्षित मेंटर्स ने प्रतिभागियों को एआई के व्यावहारिक उपयोग सिखाए।

सरल तरीके से दी गई ट्रेनिंग

महिलाओं ने सीखा कि किस तरह एआई टूल्स की मदद से पोस्टर, विजिटिंग कार्ड और प्रचार सामग्री तैयार की जा सकती है। साथ ही डिजिटल मार्केटिंग, उत्पाद डिजाइन, दस्तावेज तैयार करना, ऑनलाइन जानकारी प्राप्त करना और कौशल विकास जैसे विषयों पर भी सरल भाषा में प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम में स्वयं सहायता समूहों, कृषि समूहों और विभिन्न आजीविका पहलों से जुड़ी महिलाएं शामिल थीं। डिजिटल समावेशन को जमीनी स्तर की क्षमताओं से जोड़ने का यह प्रयास महिला-नेतृत्व वाले विकास को नई दिशा देने की पहल माना जा रहा है।

महिलाओं को बताया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन माध्यमों का सही उपयोग कर वे अपने उत्पादों और सेवाओं की पहुंच स्थानीय बाजार से बाहर तक बढ़ा सकती हैं।

केदला मध्य पंचायत की मशरूम उत्पादक प्रीति देवी ने बताती हैं कि इस प्रशिक्षण से उन्हें अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने का नया रास्ता मिला है।

उन्होंने कहा कि एआई टूल्स की मदद से अब वे अपने मशरूम उत्पादों के आकर्षक पोस्टर और प्रचार सामग्री खुद तैयार कर सकेंगी। साथ ही यूट्यूब और फेसबुक जैसे माध्यमों से विज्ञापन कर अधिक ग्राहकों तक पहुंच बनाने की योजना है।

वहीं, मांडू प्रखंड की शिक्षिका राखी देवी ने कहा कि कार्यक्रम में साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी दी गईं। प्रतिभागियों को आधार, बैंक खाते और अन्य निजी जानकारी ऑनलाइन साझा न करने की सलाह दी गई।

उन्होंने बताया कि एआई टूल्स के जरिए शिक्षक अपने विषयों से संबंधित नई जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और छात्रों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकते हैं।

महिलाओं में देखा गया खासा उत्साह

कार्यक्रम के दौरान महिलाओं में खासा उत्साह देखा गया। कई प्रतिभागियों ने कहा कि पहले वे तकनीक को जटिल मानती थीं, लेकिन अब उन्हें भरोसा हो गया है कि सही प्रशिक्षण से वे भी डिजिटल दुनिया में आत्मविश्वास के साथ कदम रख सकती हैं।

इस पहल से महिलाओं में न केवल तकनीकी समझ बढ़ी है, बल्कि अपने कारोबार और भविष्य को लेकर नया आत्मविश्वास भी पैदा हुआ है।

टाटा स्टील फाउंडेशन की यह पहल दर्शाती है कि यदि तकनीक को जमीनी स्तर तक पहुंचाया जाए, तो यह ग्रामीण समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम महिलाओं को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।