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रामगढ़ की बेटी ने रचा इतिहास, 21 साल की श्रेया ने बनाया स्वदेशी ह्यूमनाइड रोबोट सिएना

Published: Wed, 03 Jun 2026 01:33 PM (IST)

रजरप्पा की 21 वर्षीय श्रेया पंडा ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट 'सिएना' विकसित कर तकनीकी क्षेत्र में नई पहचान बनाई है।

श्रेया पंडा द्वारा बनाया गया स्वदेशी रोबोट

श्रेया पंडा द्वारा बनाया गया स्वदेशी रोबोट

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संवाद सूत्र, रजरप्पा (रामगढ़)। यह बिल्कुल सत्य है कि प्रतिभा किसी बड़े महानगर या संसाधन की मोहताज नहीं होती। दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और लगन के बल पर छोटे शहरों या गाँवों के लोग भी सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित कर सकते हैं।

डिजिटल युग ने इस दूरी को और भी कम कर दिया है, जिससे इंटरनेट के माध्यम से कोई भी व्यक्ति वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकता है। बड़े शहरों में केवल बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं, लेकिन असली हुनर और सफलता व्यक्ति की अपनी मेहनत से ही आती है।

कहते हैं यदि इंसान में लक्ष्य पाने की चाहत हो तो वह कम संसाधनों में भी अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। कुछ ऐसा ही कर दिखाई है झारखंड के रामगढ़ जिले के रजरप्पा की रहने वाली 21 वर्षीय श्रेया पंडा ने।

उन्होंने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना यानी स्मार्ट इंटरेक्टिव एजुकेशनल न्यूरल असिस्टेंट विकसित कर तकनीकी क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

आज श्रेया पंडा युवा पीढ़ी, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन गई हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, मेहनत निरंतर हो और परिवार का सहयोग मिले तो छोटे शहरों और कस्बों से भी विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

रजरप्पा की बेटी श्रेया पंडा ने रचा इतिहास

श्रेया पंडा फिलहाल पैराडॉक्स इनोवोटर प्राइवेट लिमिटेड में निदेशक एवं मुख्य परिचालन पदाधिकारी (सीओओ) के रूप में कार्यरत हैं। वह प्रसिद्ध सिद्धपीठ रजरप्पा स्थित मां छिन्नमस्तिके मंदिर के वरिष्ठ पुजारी सह मंदिर न्यास समिति के सचिव शुभाशीष पंडा और जया पंडा की बेटी हैं।

Shreya Panda

(रजरप्पा की श्रेया पंडा।)

श्रेया की इस उपलब्धि से रजरप्पा क्षेत्र में खुशी और गर्व का माहौल है। स्थानीय लोगों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों और पंडा समाज के सदस्यों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। लोगों का कहना है कि श्रेया ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी बड़े महानगर की मोहताज नहीं होती।

माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं सफलता का श्रेय

श्रेया अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को देती हैं। उन्होंने बताया कि जब भी किसी नई चुनौती का सामना करना पड़ा, तब परिवार और शिक्षकों ने उनका मनोबल बढ़ाया।

उनका कहना है कि परिवार ने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया और कभी भी उनके सपनों पर सीमाएं नहीं लगाईं यही समर्थन उन्हें कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा।

छात्राओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ना चाहती हैं श्रेया पंडा

श्रेया का अगला लक्ष्य केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है। वह ग्रामीण क्षेत्रों की छात्राओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा से जोड़ना चाहती हैं। इसके लिए वह भविष्य में नि:शुल्क रोबोटिक्स प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा कार्यक्रम शुरू करने की योजना बना रही हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को सही अवसर और मार्गदर्शन मिले तो वे भी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

रजरप्पा सहित पूरे जिले में खुशी का माहौल

श्रेया पंडा की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर रजरप्पा सहित पूरे रामगढ़ जिले में खुशी का माहौल है। लोगों ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे झारखंड का नाम रोशन किया है।

21 वर्ष की उम्र में स्वदेशी ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना का विकास कर श्रेया ने यह साबित कर दिया है कि सपनों को साकार करने के लिए बड़े संसाधनों से ज्यादा जरूरी है बड़ा विजन, कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी। छोटे शहर से भी बड़ा आविष्कार हो सकता है। बस मेहनत और हौसला चाहिए।

शिक्षा क्षेत्र के लिए विकसित किया गया सिएना

शिक्षा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया श्रेया द्वारा विकसित ह्यूमनॉइड रोबोट सिएना का पूरा नाम स्मार्ट इंटरेक्टिव एजुकेशनल न्यूरल असिस्टेंट है। यह रोबोट विद्यार्थियों को रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), कोडिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी प्रदान करने में सक्षम है।

स्कूलों, कॉलेजों और तकनीकी संस्थानों में यह एक डिजिटल शिक्षक और सहायक की भूमिका निभा सकता है। सिएना में कई आधुनिक तकनीकी सुविधाएं शामिल भी की गई हैं। इसके अलावा यह विभिन्न भाषाओं में संवाद स्थापित करने की क्षमता रखता है और छात्रों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब भी दे सकता है।

श्रेया के अनुसार, इस रोबोट को तैयार करने में करीब छह महीने का समय लगा। इस दौरान उन्होंने डिजाइनिंग, प्रोग्रामिंग, हार्डवेयर इंटीग्रेशन और परीक्षण जैसे कई चरणों पर काम किया।

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