रामगढ़ के DU मिशन की भूमि पर बिल्डर और चर्च की नजर, कब्जा मुक्त कराने के बदले डेढ़ एकड़ जमीन का प्रस्ताव
रामगढ़ के झंडा चौक और चितरपुर में डीयू मिशन की जमीन को लेकर विवाद गहरा गया है, जिसमें सीएनआई चर्च और बिल्डरों की भूमिका सामने आई है।

रामगढ़ चर्च। फाइल फोटो
HighLights
डीयू मिशन की जमीन पर सीएनआई चर्च और बिल्डर की नजर।
बिल्डर ने जमीन खाली कराने के लिए डेढ़ करोड़ का प्रस्ताव दिया।
अंचलाधिकारी को जमीन हस्तांतरण की कोई जानकारी नहीं है।
जागरण संवाददाता, रामगढ़। शहर के झंडा चौक और चितरपुर में डीयू मिशन की जमीन को लेकर भी विवाद गहरा गया है। डीयू मिशन की जमीन पर सीएनआइ चर्च और बिल्डरों की नजर है। पिछले करीब 10 वर्षों से जमीन को लेकर लेन-देन की कवायद चल रही है।
हाल के दिनों के घटनाक्रम में एक बिल्डर के पत्र और चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया डायसिस छोटानागपुर के सचिव संतोष मरांडी के पत्राचार ने इस पूरे मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।
मामला चितरपुर स्थित डीयू मिशन की करीब 10 एकड़ जमीन से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि इसमें लगभग सात एकड़ जमीन पर सीएनआइ से जुड़े लोगों का कब्जा है, जबकि करीब तीन एकड़ जमीन उनके कब्जे में नहीं है।
इसी जमीन को कब्जे में लेने के लिए चितरपुर के ग्लोब डेवलपर्स से जुड़े बिल्डर हमीद हाशमी को जिम्मेदारी दिए जाने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार डीयू मिशन जमीन के दस्तावेजों में त्रुटि दूर कराने, पंजी-टू में नाम दर्ज कराने और लगान रसीद निर्गत कराने के साथ जमीन की घेराबंदी कराने की योजना बनाई गई।
प्रस्ताव के अनुसार, जमीन के नीचे करीब चार फीट तक फाउंडेशन और ऊपर करीब दस फीट तक बाउंड्री, पिलर, वायर और गेट लगाने की बात कही गई है।
इस पूरी प्रक्रिया में करीब 1.5 करोड़ रुपये खर्च होने का दावा किया गया है। इसके एवज में बिल्डर को करीब 1.5 एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव होने की बात सामने आई है।
बिल्डर हमीद हाशमी ने गत 20 जून को डीयू मिशन, रामगढ़ को पत्र लिखकर चितरपुर की जमीन को कब्जा मुक्त कराने तथा इसके बदले जमीन के आदान-प्रदान का प्रस्ताव रखा था। इस पत्र पर चर्च आफ नार्थ इंडिया डायसिस छोटानागपुर के सचिव संतोष मरांडी ने संज्ञान लेते हुए 9 जुलाई को पेरिस सभा सदस्यों की बैठक के लिए पत्र जारी किया।
बैठक का मुख्य विषय डीयू मिशन चितरपुर की भू-संपत्ति से संबंधित विचार-विमर्श बताया गया था। इसके बाद 12 जुलाई को चितरपुर मंडली क्षेत्र में डीयू मिशन की भू-संपत्ति का भौतिक निरीक्षण और संपत्ति सुरक्षा से संबंधित कार्य किए जाने की बात सामने आई।
इसी दौरान बिल्डर हमीद हाशमी को जमीन सौंपने के प्रस्ताव पर पेरिस सभा में चर्चा होने की जानकारी भी सामने आई है। विदित हो कि डीयू मिशन की जमीन को लेकर विवाद कोई नया नहीं है। वर्ष 2016 में सीएनआइ चर्च से जुड़े कुछ लोगों द्वारा रामगढ़ के डीयू मिशन की जमीन को रांची के एक बिल्डर के साथ एग्रीमेंट किए जाने की बात सामने आई थी।
इसके बाद रांची के बिल्डर ने वर्ष 2018 में रामगढ़ न्यायालय में परिवाद संख्या 560 दर्ज कराया था। परिवाद में बिल्डर ने खुद को रांची की एडोनिस कंस्ट्रक्शन प्रिपेक्ट से जुड़ा बताते हुए कहा था कि उसे छोटानागपुर डायसियन इस्टर एसोसिएशन द्वारा रामगढ़ में डीयू मिशन की जमीन पर व्यवसायिक काम्प्लेक्स निर्माण के लिए जमीन दी गई थी।
झंडा चौक स्थित करीब 3.32 एकड़ जमीन पर व्यावसायिक काम्प्लेक्स निर्माण की तैयारी भी शुरू की गई थी तथा नक्शा पारित कराने के लिए छावनी परिषद में आवेदन दिया गया था।
हालांकि उक्त जमीन के दावेदार राजेश धान ने 21 नवंबर 2016 को छावनी परिषद में आवेदन देकर दस्तावेजों पर आपत्ति जताई थी।
इसके बावजूद निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत किए जाने का दावा भी सामने आया था। पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि डीयू मिशन की उक्त भू-संपत्ति का वैध हस्तांतरण सीएनआइ के पक्ष में हुआ है या नहीं।
चितरपुर में चर्च की जमीन काे स्थानीय कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। कब्जा मुक्त कर चर्च की जमीन को मुक्त कराने का प्रस्ताव चर्च कमेटी के लोगों को दिया गया है। इसमें करीब डेढ़ करोड़ रुपये का खर्च आएगा। इसके बदले में चर्च कमेटी को डेढ़ एकड़ जमीन देने का प्रस्ताव दिया गया है। इस संबंध में लगातार चर्च कमेटी से पत्राचार किया जा रहा है। - हमीद हाशमी, बिल्डर चितरपुर रामगढ़
मामला संज्ञान में नहीं आया है। डीयू मिशन ने किसे प्रोपर्टी ट्रांसफर की है, इसकी जानकारी उन्हें या अंचल कार्यालय नहीं दी गई है। किस स्थिति से सीएनआइ चर्च उक्त जमीन पर काबिज है, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - दीपक मिंज, अंचलाधिकारी चितरपुर अंचल
