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करोड़ों खर्च फिर भी असुरक्षित वन्यजीव: रामगढ़ में सात दिनों में दो हिरणों ने तोड़ा दम, शोपीस बना डियर पार्क

Published: Tue, 12 May 2026 08:13 PM (IST)

रामगढ़ के गोला वन क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर दो हिरणों की मौत ने वन विभाग की कार्यशैली पर ...और पढ़ें

गोला वन क्षेत्र अंतर्गत चोकाद गांव में मृत हिरण  की जांच करते वन विभाग के पदाधिकारी।

गोला वन क्षेत्र अंतर्गत चोकाद गांव में मृत हिरण की जांच करते वन विभाग के पदाधिकारी।

HighLights

  1. चोकाद गांव में हिरण शौचालय पाइप में फंसकर मरा।

  2. करोड़ों का डियर पार्क वन्यजीव संरक्षण में विफल।

संवाद सूत्र, जागरण गोला (रामगढ़)। जंगलों में घटते संसाधन और वन्य जीवों के लिए सुरक्षित गलियारों की कमी अब बेजुबान जानवरों की जान पर भारी पड़ने लगी है। रामगढ़ जिले के गोला वन क्षेत्र में लगातार दूसरे हिरण की मौत ने न केवल स्थानीय ग्रामीणों को झकझोर दिया है, बल्कि वन विभाग के संरक्षण दावों की पोल भी खोल दी है।
 

भोजन की तलाश बनी आखिरी सफर 

ताजा मामला गोला वन क्षेत्र के चोकाद गांव का है। सोमवार की रात एक हिरण भोजन और पानी की तलाश में भटकते हुए जंगल से निकलकर रिहायशी इलाके में आ पहुंचा। 
 
चोकाद निवासी बीरबल महतो के घर के पास एक संकरी गली में बिछी शौचालय पाइप के बीच वह हिरण बुरी तरह फंस गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, हिरण रातभर बाहर निकलने के लिए छटपटाता रहा। 
 
ग्रामीणों ने उसे बचाने की कोशिश भी की, लेकिन पाइप और दीवार के बीच फंस जाने के कारण वह निकल नहीं सका। आखिरकार, घंटों की तड़प के बाद उस बेजुबान ने दम तोड़ दिया। 
 
मंगलवार सुबह जब ग्रामीणों की नजर मृत हिरण पर पड़ी, तो वन विभाग को सूचना दी गई। टीम ने मौके पर पहुंचकर हिरण के शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
 

एक सप्ताह में दूसरी घटना 

हैरानी की बात यह है कि पिछले सात दिनों के भीतर गोला वन क्षेत्र में हिरण की मौत का यह दूसरा मामला है। इससे पहले बीसा गांव में भी एक हिरण घायल अवस्था में मिला था। 
 
वन विभाग उसे इलाज के लिए ले गया था, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। लगातार हो रही इन मौतों से पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी नाराजगी है।
 

करोड़ों का 'डियर पार्क' बना सफेद हाथी 

घटना ने वन विभाग की कार्यशैली और निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वन्य जीवों के संरक्षण और पुनर्वास के नाम पर पुरबड़ीह वन कार्यालय के समीप करोड़ों रुपये की लागत से 'सॉफ्ट डियर पार्क' का निर्माण कराया गया था। 
 
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पार्क का आज तक सही उपयोग नहीं हो सका है। यदि पार्क सक्रिय होता और वन्य जीवों के लिए जंगल के भीतर ही भोजन-पानी की व्यवस्था होती, तो शायद ये हिरण गांवों की ओर रुख नहीं करते।
 

खतरे में प्राकृतिक संतुलन 

जंगलों का सिमटना और वन्य जीवों का बस्तियों की ओर पलायन करना प्राकृतिक संतुलन के बिगड़ने का स्पष्ट संकेत है। 

  •     संसाधनों की कमी: जंगलों में चारा और पानी की कमी जानवरों को रिहायशी इलाकों की ओर धकेल रही है। 
  •     विभागीय अनदेखी: करोड़ों के फंड के बावजूद धरातल पर संरक्षण के प्रयास शून्य नजर आ रहे हैं।
  •     विलुप्ति की कगार: अगर यही स्थिति रही, तो क्षेत्र से दुर्लभ हिरण और अन्य जीव विलुप्त हो जाएंगे, जिसका सीधा असर हमारी खाद्य श्रृंखला और पर्यावरण पर पड़ेगा।


चोकाद की इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल कागजों पर संरक्षण की योजनाएं बनाने से वन्य जीव सुरक्षित नहीं होंगे। इसके लिए धरातल पर ठोस पहल, सक्रिय गश्त और डियर पार्क जैसे संसाधनों के उचित संचालन की तत्काल आवश्यकता है। अन्यथा, बेजुबान जीवों की मौतों का यह सिलसिला थमने वाला नहीं है।