रामगढ़ : शहर के श्री दिगंबर जैन मंदिर व रांची रोड स्थित पा‌र्श्वनाथ जैन मंदिर में रविवार को दशलक्षण महापर्व के तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा धूमधाम के साथ किया गया। तीसरे दिन उत्तम आर्जव धर्म की पूजा में भक्तों की भीड़ उमड़ती रही। पूजन के दौरान प्रतिष्ठाचार्य सूर्य शास्त्री ने कहा कि क्या होता हैं उत्तम आर्जव धर्म क्या है। यह धर्म मन, वचन, काम पूर्वक कुटिलता का त्याग करना ही आर्जव धर्म है। वक्रता, कुटिलता, मायाचारी हमारे जीवन का टेढ़ापन है। जीवन को सीधा वही कर पाते हैं, जो साधना के प्रहार को झेलने के लिए तत्पर रहते है। बुद्धिमता, कुटिलता, जटिलता और कपट का अभाव ही उत्तम आर्जव धर्म है। इधर मुख्य कलश को मंदिर में स्थापित रामेश सेटी व नागरमल जैन ने किया। प्रथम जलाभिषेक रमेश सेटी, अमित सेटी, हरकचंद अजमेरा, शांतिधारा विकास सेटी, विवेक अजमेरा ने किया। महाआरत रमेश कुमार, विवेक कुमार व अमित सेटी व राहुल जैन आदि ने किया। सोमवार को उत्तम शैच धर्म की पूजा की जाएगी। इस दौरान हीरालाल पाटनी, संजय सेटी, संपतलाल चुरीवाल, हरजीलाल जैन, सुभाष जैन, नरेंद्र जैन,देवंद्र जैन, सुरेश सेटी, दिलीप चुरीवाल, नरेंद्र छाबरा, सुभाष पाटनी, ललीत जैन, रमेश सेटी, ललीत चुरीवाल, महावीर जैन, कनल जैन, भागचंद जैन, मीना जैन, डॉली जैन, शारदा जैन, उषा जैन, कवर देवी बगरा, प्रतिभा सेटी व राहुल जैन आदि बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद थे।

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