रामगढ़ : जिला जज प्रथम बबीता प्रसाद के न्यायालय ने बुधवार को पांच वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले में मनिरुल अंसारी उर्फ हंसा को 20 वर्ष की सजा सुनाई है। इसके अलावा तीन हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है जुर्माने की राशि नहीं देने पर एक महीने अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई है। स्पीडी ट्रायल में मामले की सुनवाई करते चार महीने में आरोपित को न्यायालय ने गत 10 सितंबर को दोषी करार दिया था।

सूबे में पहली बार आइपीसी की धारा 376 एबी में न्यायालय द्वारा 20 वर्ष की सजा सुनाई गई है। अभियोजन ने इस मामले में काफी सक्रियता दिखाई और दस दिनों के अंदर सभी नौ गवाहों की गवाही पूरी करा ली थी। न्यायलय ने भी चार महीने से भी कम समय में आरोपित को सजा सुना दी। न्यायालय ने गत 10 सितंबर को सुनवाई के दौरान आरोपित को 376 एबी, 376 (2) एफ आइपीसी, 6 पोक्सो एक्ट के तहत दोषी पाया था। एसटी 485/2018 की सुनवाई में अभियोजन की ओर से चिकित्सक सहित कुल नौ गवाहों का साक्ष्य न्यायालय में कराया गया था। चिकित्सक ने भी बच्ची के प्राइवेट पार्ट में जख्म पाए थे। पांच वर्षीय बच्ची ने भी न्यायालय में आरोपित मनिरुल अंसारी की पहचान करते हुए उसके खिलाफ बयान दिया था। अपर लोक अभियोजक एस के शुक्ला ने इस अपराध के लिए आरोपित को कड़ी सजा देने की मांग न्यायालय से की थी। बच्ची के साथ 23 अप्रैल 2018 को घटना हुई थी। केंद्र सरकार ने देश में बढ़ती बच्चियों से दुष्कर्म की घटनाओं को देखते हुए 22 अप्रैल को बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में कानून में संशोधन से संबंधित अध्यादेश पारित किया था।

Posted By: Jagran