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रागी की खेती में आया नया 'गेम चेंजर'! रामगढ़ में इस मशीन से कम खर्च में बढ़ेगा उत्पादन, किसानों की बढ़ेगी कमाई

Published: Sun, 05 Jul 2026 02:00 PM (GMT+05:30)

कृषि विज्ञान केंद्र मांडू, रामगढ़ ने ड्राई कोनोवीडर का उपयोग कर रागी की खेती में सफलता हासिल की है। यह ...और पढ़ें

ड्राई कोनोवीडर से रागी की खेती करते किसान।

ड्राई कोनोवीडर से रागी की खेती करते किसान।

HighLights

  1. ड्राई कोनोवीडर से रागी की खेती में सफलता मिली।

  2. कम लागत में खरपतवार नियंत्रण और बेहतर मिट्टी प्रबंधन।

संवाद सूत्र, मांडू (रामगढ़)। कृषि विज्ञान केंद्र, मांडू रामगढ़ द्वारा रागी (मड़ुआ) की खेती में आधुनिक कृषि यंत्र ड्राई कोनोवीडर के सफल प्रदर्शन ने किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए हैं। केंद्र के प्रक्षेत्र में रागी की उन्नत किस्म बीवीएम-10 पर किए गए इस प्रदर्शन में ड्राई कोनोवीडर के उपयोग से फसल की बढ़वार, खरपतवार नियंत्रण तथा मिट्टी प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

केवीके प्रक्षेत्र प्रबंधक सन्नी कुमार ने बताया कि रागी की खेती में समय पर निराई-गुड़ाई उत्पादन बढ़ाने का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। पारंपरिक विधि से यह कार्य अधिक श्रमसाध्य एवं खर्चीला होता है, जबकि ड्राई कोनोवीडर के उपयोग से कम समय और कम लागत में बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान यंत्र से खेत की कतारों के बीच आसानी से निराई-गुड़ाई की गई, जिससे खरपतवार का प्रभावी नियंत्रण हुआ और पौधों को पर्याप्त पोषक तत्व एवं नमी उपलब्ध हो सकी। उन्होंने बताया कि ड्राई कोनोवीडर चलाने से मिट्टी का भुरभुरापन बढ़ता है तथा वायु संचार बेहतर होने से पौधों की जड़ों का विकास तेजी से होता है।

इसके परिणामस्वरूप पौधों की टिलरिंग (शाखाओं का विकास) में वृद्धि होती है, जिससे अधिक बालियां बनने और उत्पादन बढ़ने की संभावना रहती है। साथ ही खेत में नमी संरक्षण भी बेहतर होता है, जो वर्षा आधारित खेती के लिए अत्यंत लाभकारी है।

केवीके के प्रभारी डॉ सुधांशु शेखर  ने किसानों से आधुनिक कृषि यंत्रों को अपनाने की अपील करते हुए कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों के उपयोग से खेती को लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ड्राई कोनोवीडर न केवल श्रम और लागत में कमी लाता है, बल्कि समय पर खेत प्रबंधन सुनिश्चित कर फसल की गुणवत्ता एवं उत्पादकता भी बढ़ाता है।

कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों से अपील की है कि वे समय पर निराई-गुड़ाई कर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें। रागी जैसी पोषक एवं जलवायु अनुकूल फसल में यह तकनीक किसानों के लिए भविष्य में एक प्रभावी विकल्प साबित हो सकती है।