तरुण बागी, रामगढ़ : जिले के रामगढ़ थाने में व्यवस्था बड़ी विचित्र है। थाना परिसर में अवस्थित पुलिस निरीक्षक के कार्यालय में पिछले करीब 10 साल से विभाग के कोई पुलिस कर्मी नहीं बल्कि निजी व्यक्ति पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी स्तर के कांड में केस डायरी व जांच प्रतिवेदन लिखने का काम करते आ रहे हैं। हालांकि निजी तौर पर काम कर रहे व्यक्ति पर थाने में आने वाले पीड़ित व्यक्ति द्वारा किसी भी तरह की शिकायत अभी तक भले ही दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन जिले में पुलिस की व्यवस्था व गोपनियता पर सवाल जरूर उठ रहा है। कुल मिलाकर रामगढ़ थाने में निजी व्यक्ति के हाथों पुलिस निरीक्षक का कार्यालय संचालित हो रहा है। विभिन्न तरह के मामलों के निष्पादन मसलन केस डायरी, जांच प्रतिवेदन को अद्यतन करने का कार्य फौरी तौर पर निजी व्यक्ति के हाथों है। कंप्यूटर आपरेट करने में माहिर शहर के गोलपार निवासी मो नाजिश सुबह से लेकर शाम तक अपने काम में व्यस्त रहता है। इसके एवज में थाना प्रभारी की और से निजी तौर पर काम के एवज में 25-30 हजार रुपये का प्रतिमाह भुगतान किया जाता है। इसमें सरकारी राशि का कोई उपयोग नहीं होता है। पिछले 10 साल से जो भी थाना प्रभारी यहां पदस्थापित होते हैं, उन्हें थाने के दैनिकी खर्चे से निजी तौर पर उसे राशि का भुगतान प्रतिमाह करना पड़ता है। जानकारी के अनुसार अमूनन ऐसा होता है किसी भी बात को लेकर दो पक्षों में विवाद व मारपीट की घटना के बाद भुक्तभोगियों द्वारा गले से चैन छिन लेने, जेब से राशि निकाल लेने के अलावा मारपीट कर गंभीर रूप से घायल करने की प्राथमिकी दर्ज की जाती है। इस तरह के मामले में धारा धारा 379 व 307 भादवि के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाती है। इस तरह के गैर जमानती मामलों की जांच उसे क्षेत्र के पुलिस निरीक्षक ही करते हैं। इस तरह के कांडों से धारा 379 व 307 हटाने के लिए निजी व्यक्ति से मिलने से ही संबंधित व्यक्ति का सारा काम हो जाता है। जानकारी के अनुसार वर्तमान समय में रामगढ़ जिले में साक्षर पुलिसकर्मियों की कोई कमी नहीं है। फिर भी निजी व्यक्ति से पुलिस की गोपनियता के कार्यों के लिए निजी व्यक्ति से काम लेना थाना प्रभारियों की क्या मजबूरी है। इस पर भी सवाल खड़ा हो गया है।

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पिछले कई साल से पुलिस निरीक्षक कार्यालय में निजी व्यक्ति काम कर रहा है। रामगढ़ में पदभार ग्रहण किया तो निजी व्यक्ति को ही काम करते पाया। उक्त निजी व्यक्ति थाने का काम नहीं बल्कि पुलिस निरीक्षक के कार्यों का निष्पादन करता है। यह व्यवस्था थाने की 10 साल पुरानी चल रही है। निजी तौर पर ही प्रत्येक माह भुगतान करना पड़ता है। इसमें किसी की कोई शिकायत भी नहीं है।

- रोहित कुमार, पुलिस निरीक्षक सह थाना प्रभारी रामगढ़ ।

Edited By: Jagran