यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
राष्ट्रभक्ति की भावना जगाती है संस्कृत
रामगढ़ : सिदो-कान्हो मैदान के समीप बाल केंद्र में शुक्रवार से दस दिवसीय संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण

रामगढ़ : सिदो-कान्हो मैदान के समीप बाल केंद्र में शुक्रवार से दस दिवसीय संस्कृत संभाषण प्रशिक्षण का विधिवत शुभारंभ किया गया है। इसमें जिलेभर के संस्कृत प्रेमी बच्चे शामिल हुए । प्रशिक्षण का शुभारंभ उच्च विद्यालय जमीरा की सहायक शिक्षिका प्रतिमा कुमारी ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप जलाकर किया। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कृत पढ़ने से राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत होती है। यह भाषा अच्छे संस्कारों को जन्म देती है। साथ ही प्रेम एवं सछ्वावना को विकसित करती है। कहा कि इस भाषा का प्रतिदिन उच्चारण करने से हमारी सभी ज्ञानेंद्रिया सक्रिय हो जाती है। इससे दिमाग भी तेज हो जाता है। उत्क्रमित उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक श्याम किशोर महतो ने कहा कि संस्कृत भाषा एक देवभाषा है। यह प्राचीनतम भाषाओं में सबसे पुरानी है। कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत भाषा रोजगार के क्षेत्र में बहुत सहायक सिद्ध हो रही है। प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक डॉ. सुनील कुमार कश्यप ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की आत्मा है और जननी है। संस्कृत का भविष्य उज्जवल है। देशभर में सब जगह संस्कृत छात्रों की संख्या बढ़ रही है। विश्व में 34 देशों में अध्ययन हो रहा है। 110 वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थानों में संस्कृत शास्त्रों के विषय में खोज हो रही है। शिविर में बड़ी संख्या में बच्चे व अभिभावकगण मौजूद थे।
