कब से शुरू हो रहा है पितृपक्ष? सभी भाई कर सकते हैं पिंडदान; श्राद्ध की पूरी तिथियां और जरूरी नियम
Pitru Paksha 2026 Schedule: पंडित गोपाल मिश्र के अनुसार, पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चलेगा और इस वर्ष ...और पढ़ें

ज्येष्ठ ही नहीं, सभी भाइयों को है पितरों के तर्पण और पिंडदान का अधिकार।
HighLights
पितृपक्ष 27 सितंबर से 10 अक्टूबर तक, इस वर्ष 14 दिन।
गयाजी में पिंडदान के बाद भी तर्पण करना शास्त्रसम्मत।
ज्येष्ठ ही नहीं, सभी भाई कर सकते हैं पितरों का तर्पण।
संवाद सूत्र, मेदिनीनगर (पलामू)। सनातन परंपरा में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का महापर्व 'पितृपक्ष' (पितृ महोत्सव) आगामी 27 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है, जो 10 अक्टूबर तक चलेगा।
इस वर्ष आश्विन माह कृष्ण पक्ष कुल 14 दिनों का ही होगा, क्योंकि इस बार नवमी तिथि की हानि (क्षय) हो रही है। उक्त बातें शांतिपुरी (मेदिनीनगर) निवासी ज्योतिषाचार्य पंडित गोपाल मिश्र ने कहीं।
पितरों के आशीर्वाद से होती है कुल और यश की वृद्धि
पंडित गोपाल मिश्र ने बताया कि सनातन धर्म में पितृपक्ष को पितृ महोत्सव के रूप में उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाने का विधान है। कुल के वे सभी पूर्वज, जो अब इस भौतिक संसार में नहीं हैं, उनकी आत्मा की तृप्ति के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है।
शास्त्र सम्मत नियमों के अनुसार पितरों को तृप्त करने से घर-परिवार में यश, कीर्ति, दीर्घायु और सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है। वहीं पितरों की उपेक्षा करने पर पितृ दोष और अमंगल का सामना करना पड़ता है।

पंडित गोपाल मिश्र।
धार्मिक भ्रांतियों पर विराम: क्या कहते हैं शास्त्र?
गयाजी के बाद भी तर्पण अनिवार्य: समाज में यह भ्रम है कि गयाजी में पिंडदान के बाद तर्पण की जरूरत नहीं होती, जो कि सर्वथा अनुचित है। गयाजी के बाद भी पितृपक्ष में मृत्यु तिथि पर (या तिथि ज्ञात न होने पर सर्वपित्री अमावस्या को) तर्पण करना शास्त्रसम्मत है।
सभी भाई कर सकते हैं तर्पण: केवल बड़े भाई (ज्येष्ठ) द्वारा ही तर्पण करने की बात भी निराधार है। कनिष्ठ अथवा परिवार के सभी भाई अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण कर उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
पितृपक्ष 2026: श्राद्ध एवं तर्पण की संपूर्ण तिथियां
| तिथि (तर्पण / श्राद्ध) | दिनांक |
| पूर्णिमा श्राद्ध | 26 सितंबर |
| प्रतिपदा श्राद्ध | 27 सितंबर |
| द्वितीया श्राद्ध | 28 सितंबर |
| तृतीया श्राद्ध | 29 सितंबर |
| चतुर्थी श्राद्ध | 30 सितंबर |
| पंचमी / षष्ठी श्राद्ध | 01 अक्टूबर |
| सप्तमी श्राद्ध | 02 अक्टूबर |
| अष्टमी श्राद्ध | 03 अक्टूबर |
| नवमी श्राद्ध | 04 अक्टूबर |
| दशमी श्राद्ध | 05 अक्टूबर |
| एकादशी श्राद्ध | 06 अक्टूबर |
| द्वादशी श्राद्ध | 07 अक्टूबर |
| त्रयोदशी श्राद्ध | 08 अक्टूबर |
| चतुर्दशी श्राद्ध | 09 अक्टूबर |
| सर्वपैत्री अमावस्या व पितृ विसर्जन | 10 अक्टूबर |
