झारखंड में ट्रक बेचकर फंसा मालिक, फाइनेंस के जाल में ₹8,30,000 का घाटा
मेदिनीनगर में एक ट्रक मालिक को वाहन बेचने के बाद भी फाइनेंस की किस्तों का भुगतान करना पड़ रहा है, क्योंकि खरीदारों ने धोखा दिया।

एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
ट्रक बेचकर भी मालिक फाइनेंस किस्तों में फंसा।
खरीदारों ने 3.50 लाख देकर 11.80 लाख का सौदा किया।
नावा जयपुर थाने में धोखाधड़ी की प्राथमिकी दर्ज हुई।
जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। ट्रक बेचकर फाइनेंस की किस्तों से छुटकारा पाने की उम्मीद वाहन मालिक के लिए परेशानी का सबब बन गई।
आरोप है कि दो सगे भाइयों ने 11 लाख 80 हजार रुपये में ट्रक खरीदने का सौदा किया और 3 लाख 50 हजार रुपये नकद देकर वाहन अपने कब्जे में ले लिया।
कुछ महीने तक किस्त जमा करने के बाद भुगतान बंद कर दिया गया। इसके बाद फाइनेंस कंपनी ने ट्रक के मूल मालिक पर बकाया किस्तों के भुगतान का दबाव बनाना शुरू कर दिया। मामले में नावा जयपुर थाने में दोनों भाइयों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
प्राथमिकी के अनुसार, नावा जयपुर थाना क्षेत्र के टुईया गांव निवासी आफताब खान, पिता सउद खान, के नाम पर 12 चक्का मसाला ट्रक (जेएच-01-बीएक्स-1343) एचडीबी फाइनेंस की डालटनगंज शाखा से फाइनेंस कराया गया था।
आफताब श्री सीमेंट के लिए आरके ट्रांसपोर्ट, सरायकेला-खरसावां के माध्यम से गढ़वा-डालटनगंज मार्ग पर ट्रक चलाता था। हर महीने 38 हजार रुपये की किस्त चुकाने में परेशानी होने के कारण उसने ट्रक बेचने का निर्णय लिया।
इसी दौरान उसकी मुलाकात आरके ट्रांसपोर्ट के मैनेजर नीरज कुमार पांडे से हुई। आरोप है कि नीरज ने ट्रक खरीदने में रुचि दिखाई। बातचीत के बाद वाहन का सौदा 11 लाख 80 हजार रुपये में तय हुआ।
24 अगस्त 2022 को हुआ था एग्रीमेंट
आवेदक के अनुसार, 24 अगस्त 2022 को ट्रक की बिक्री को लेकर एग्रीमेंट किया गया। समझौता नीरज कुमार पांडे के बड़े भाई अभिमन्यु कुमार पांडे उर्फ पंकज पांडे, पिता स्वर्गीय रवींद्रनाथ पांडे, के नाम पर कराया गया।
सौदे के दौरान 3 लाख 50 हजार रुपये नकद दिए गए। शेष राशि और फाइनेंस की किस्तों के भुगतान को लेकर सहमति बनी कि आगे की किस्तें वाहन खरीदने वाला पक्ष जमा करेगा।
आफताब का आरोप है कि शुरुआत में कुछ महीनों तक किस्तों का भुगतान किया गया, लेकिन बाद में इसे बंद कर दिया गया।
इससे फाइनेंस कंपनी ने बकाया किस्तों के लिए ट्रक के मूल मालिक पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। वाहन बेचने के बावजूद किस्तों की जिम्मेदारी को लेकर परेशानी बढ़ने पर आफताब ने खरीदारों के पते की पड़ताल की।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दोनों भाइयों ने अपना पता रायपुर, वीरगंज बताया था, जो गलत निकला। उनका वास्तविक पता ग्राम आमर, पोस्ट मझिआंव, थाना मझिआंव, जिला गढ़वा बताया गया है।
वाहन मालिक ने पूरे मामले को सुनियोजित धोखाधड़ी बताते हुए पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के आधार पर नावा जयपुर थाने में दोनों सगे भाइयों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है।
मामले की जांच एसआइ अनिल कुमार यादव को सौंपी गई है। पुलिस जांच के बाद ही ट्रक बिक्री के समझौते, भुगतान और फाइनेंस की किस्तों से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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