बालू नीलामी की बदली नीति, अब मात्र 12.97 लाख से लगा सकेंगे बोली; पलामू में 18 घाट 30 सितंबर को बंटेंगे
पलामू जिले में बालू संकट दूर करने के लिए 18 बालू घाटों की पांच वर्षीय नीलामी का अंतिम मौका 30 ...और पढ़ें

पलामू में 18 बालू घाटों की नीलामी का अंतिम मौका, 30 को होगी बोली।
HighLights
पलामू में 18 बालू घाटों की नीलामी का अंतिम मौका।
न्यूनतम 12.97 लाख रुपये अग्रधन राशि से नीलामी में भाग लें।
30 सितंबर को होगी ई-नीलामी, बालू संकट होगा दूर।
संवाद सूत्र, मेदिनीनगर (पलामू)। जिले में बालू संकट दूर करने की कवायद तेज हो गई है। श्रेणी-दो के तहत आने वाले 18 बालू घाटों की पांच वर्षीय नीलामी प्रक्रिया का अंतिम मौका आ गया है। जिला खनन पदाधिकारी ने पत्रांक 2143 दिनांक 10 सितंबर 2026 को इसकी सूचना जारी की है।
नीलामी में मात्र 12 लाख 97 हजार 262 रुपये की न्यूनतम अग्रधन राशि से भाग लिया जा सकता है। जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट और पुनर्भरण अध्ययन के आधार पर अमानत, सोन व उत्तर कोयल नदी पर स्थित घाटों को चिह्नित किया गया है।
इनमें तरहसी, पांकी, हैदरनगर, मोहम्मदगंज, पाटन, विश्रामपुर, लेस्लीगंज, हुसैनाबाद, मेदिनीनगर, पांडू और चैनपुर सहित कुल 18 मौजा शामिल हैं। खनन कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार ई निविदा दस्तावेज व अग्रधन राशि जमा करने को 11 सितंबर सुबह 10 बजे से 25 सितंबर दोपहर 2 बजे तक जमा किया जा सकता है।
तकनीकी व वित्तीय निविदा 26 सितंबर को दोपहर 2 बजे खोली जाएगी। जिला स्तरीय समिति द्वारा इसका मूल्यांकन 28 सितंबर सुबह 10 बजे किया जाएगा। घाटों की ई-नीलामी 30 सितंबर को सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक झारखंड टेंडर डॉट जीओवी पर होगी।
विभाग ने बताया कि बालू घाटों का अंतिम मूल्य पर्यावरणीय स्वीकृति में दर्ज मात्रा के अनुरूप तय होने से पूरी वित्तीय पारदर्शिता रहेगी। उच्चतम डाकवक्ता को मात्र 10 प्रतिशत राशि भुगतान पर ही एलओआई दे दी जाएगी और शेष राशि के लिए आसान किस्तों की व्यवस्था है।
विभाग के अनुसार यहां उच्च गुणवत्ता वाला बालू उपलब्ध होने के साथ परिवहन के लिए सड़क मार्ग और रेलवे साइडिंग दोनों की सुविधा है। बता दें कि जिले में श्रेणी-दो के कुल 19 घाट चिह्नित हैं।
इनमें पाटन प्रखंड के कांके कला घाट (4.08 हेक्टेयर) की पूर्व में ही नीलामी हो चुकी है। राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण से पर्यावरणीय स्वीकृति मिलने के बाद इसकी बाधा दूर हो गई है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति और संचालन की स्वीकृति मिलते ही 15 अक्टूबर के बाद यहां से उठाव शुरू हो जाएगा। इससे बालू संकट कुछ हद तक दूर होगा।
