पलामू आसपास लीड कवि सम्मेलन सह मुशायरा के साथ प्रेमचंद जयंती समारोह संपन्न संवाद सहयोगी, मेदिनीनगर (पलामू) : मुंशी प्रेमचंद जयंती समारोह को लेकर स्थानीय रेड़मा स्थित इप्टा कार्यालय में कवि सम्मेलन सह मुशायरा का आयोजन किया गया। इप्टा , प्रगतिशील लेखक संघ, जसम, भारत ज्ञान विज्ञान समिति व अदबी संसार के संयुक्त तत्वावधान में इसका आयोजन किया गया था। इसकी अध्यक्षता डा मकबूल मंजर व संचालन प्रेम प्रकाश ने किया। कवियत्री सुषमा श्रीवास्तव ने कहा कि गांव की गलियों, खेतों से खलिहान ओसारों से, कलम चलाई तूने मुंशी, झोपड़ और चौबारों से। एमजे अजहर ने कहा कि भाई-भाई में कहां अब प्यार है, बीच आंगन में खड़ी दीवार है। नुदरत नवाज ने कहा कि जो तुमने दिया दर्द-ए-जिगर है कि नहीं है, दामन भी तेरा खून से तर है कि नहीं है। शमीम रिजवी ने कहा कि औरों को जो काम आए अच्छा हुनर वही है, गिरतों को जो संभाले फतही जफर वही है। घनश्याम कुमार ने कहा कि गजब की ये आधुनिकता संत की पुकार कौन सुने, जब सुगंध ही है कृत्रिम तो पुष्पों की महक कौन सूंघे। इप्टा के रंगकर्मी प्रेम प्रकाश ने कहा कि जीवन की पहिया को गति देता है अनाज, कारखानों का चक्का घुमाता है अनाज। डा इंतखाब असर ने कहा कि जिसको महसूस करने की आदत नहीं, वह हुकूमत हुकूमत नहीं। डा मकबूल मंजर ने कहा कि दिल में पछतावा लिए हैं लोग मंजर, जब नए सूरज से भी धोखा हुआ है। इसके बाद प्रेमचंद के व्यक्तित्व व कृतित्व पर गोष्ठी आयोजित हुई। इसमें इप्टा के राष्ट्रीय सचिव शैलेंद्र कुमार, सेवानिवृत्त प्राचार्य राजेश कुमार व शिव शंकर प्रसाद ने अपने विचारों को व्यक्त किया। मौके पर उपेंद्र कुमार कुमार मिश्र, निषाद खान, रवि शंकर, अजीत ठाकुर, संजीत दुबे, समरेश सिंह, विकास कुमार पप्पू व भोला आदि उपस्थित थे।

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