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कोरोना संक्रमितों का यहां होगा अंतिम संस्कार, मौतों की संख्या बढ़ी तो खुली नींद संवाद सहयोगी

मेदिनीनगर (पलामू) : कोरोना संक्रमण से मृत्यु दर में आई बढ़ोतरी के बाद पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर के पहाड़ी मुहल्ला स्थित राजा हरिश्चंद्र श्मशान घाट में बर्निंग मशीन की शुरूआत कर दी गई है। महज 15 दिनों के भीतर 58 लोगों का इस घाट पर अंतिम संस्कार भी हो चुका है। पिछले दो वर्षों से यहां के लोगों को श्मशान घाट में बर्निंग मशीन क्रियाशील होने का इंतजार था। मेदिनीनगर नगर निगम की महापौर अरूणा शंकर व उप महापौर राकेश कुमार सिंह की अपेक्षित पहल के बाद इसकी शुरूआत हुई है। दाह-संस्कार के लिए दर भी निर्धारित है। घाट पर इससे संबंधित नोटिस बोर्ड भी लगाए गए हैं। बहरहाल, मशीन के क्रियाशील होने से शव लेकर घाट पर पहुंचने वाले लोगों को काफी हद तक राहत मिली है। कोरोना में तेजी से हो रही मौत के कारण श्मशान घाट का हाल बेहाल था। शवों के अंतिम संस्कार करने के लिए पहले लोगों को लकड़ी खरीदने के लिए लाइन लगानी पड़ती थी। इसके बाद बीच नदी तक लकड़ी ले जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। कर्मकांड के लिए पुरोहितों को खोजना पड़ता था। इस पूरी व्यवस्था में शवों के अंतिम संस्कार में तीन घंटे से ज्यादा समय लग जाता था। हालांकि काफी हद तक इस परेशानी से छुटकारा मिल गया है। बाक्स..1.75 करोड़ की लागत से बना है राजा हरिश्चंद्र श्मशान घाट

पहाड़ी मुहल्ला में स्थित राजा हरिश्चंद्र घाट शहर का सबसे पुराना श्मशान घाट है। अधिकांश शवों का दाह संस्कार इसी घाट पर होता है। तीन वर्ष पूर्व जुडको से इस घाट का सुंदरीकरण का कार्य शुरू कराया गया। 1.75 करोड़ की लागत से भव्य श्मशान घाट तैयार हुआ तो इसमें बर्निंग मशीन भी लगाई गई। पिछले दो वर्षों से मशीन लगाए जाने के बावजूद इसे चालू नहीं कराया जा सका था।

बाक्स..विदेश में रहकर भी अंतिम संस्कार का कर सकेंगे दर्शन

मेदिनीनगर : मेदिनीनगर के राजा हरिश्चंद्र घाट को हाइटेक बनाया जा रहा है। देश-विदेश में बैठे लोग भी श्मशान घाट में अंतिम संस्कार का दर्शन कर सकेंगे। इसके लिए चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज झारखंड के उपाध्यक्ष आकर्ष आनंद ने घाट में हाइटेक सीसीटीवी कैमरा व इंवर्टर लगवाया है। उन्होंने बताया एक सप्ताह के भीतर यह कार्य करने लगेगा। इसी तरह कोरोना को देखते हुए राजा हरिश्चंद्र घाट में चैंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज की ओर से महज तीन रूपए प्रति किलो लकड़ी उपलब्ध कराई जा रही है। रिकू दुबे व मो अनवर इसकी निगरानी कर रहे हैं।