मेदिनीनगर (पलामू), [तौहीद रब्बानी]। पलामू संसदीय क्षेत्र का लोकसभा चुनाव स्वयं में दिलचस्प बन गया है। इस चुनाव में कई बार नेताओं की स्थिति से समर्थकों में संशय उत्पन्न हो जाता है। सच और सच्चाई पर धूल की परत नजर आती है। ऐसी ही स्थिति पलामू लोकसभा अनुसूचित संसदीय क्षेत्र के निर्दलीय प्रत्याशी जोरावर राम के साथ बनी है।

पलामू के पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री रहे जोरावर के बड़े बेटे राकेश कुमार पासवान झामुमो के केंद्रीय सदस्य हैं। और छोटे पुत्र राजेश रौशन युवा राजद के उपाध्यक्ष हैं। ये दोनों बेटे महागठबंधन के प्रत्याशी घुरन राम के पक्ष में जी-जान से प्रचार में जुटे हैं। दो राजनीतिक दलों के दो नेता पुत्र के पिता जोरावर राम निर्दलीय से चुनावी रण में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।

ऐसे में जोरावर राम को घर में ही राजनीतिक सेंधमारी का सामना करना पड़ रहा है। इस चुनावी रणभूमि में वे स्वयं को बेगाना महसूस कर रहे हैं। दरअसल टिकट मिलता नहीं देख जोरावार राम राजद से त्यागपत्र देकर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में किस्मत आजमाने उतर गए। नामांकन के एक दिन पूर्व बेल टूटी में उन्हें मेदिनीनगर सेंट्रल जेल जाना पड़ा।

नामांकन के अंतिम दिन उन्होंने जेल से ही पर्चा दाखिल किया। वे सोमवार 22 अप्रैल को जेल से छूटे। वे 23 अप्रैल को चुनाव प्रचार के लिए निकले तो उनके दोनों बेटे साथ नहीं थे। मतदाताओं ने देखा कि उनका बड़ा बेटा राकेश व दूसरा बेटा राजेश महागठबंधन के प्रत्याशी राजद के घुरन राम के लिए वोट मांग रहे हैं। इधर, उनके पिता जोरावर राम निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में वोट मांग रहे हैं।

जोरावर राम कहते हैं कि उनकी जीत सुनिश्चित है। लोकसभा की इस चुनावी समर में उनकी सीधी टक्कर राजद प्रत्याशी घुरन राम से है। वे घुरन राम को पटखनी देकर रहेंगे। जोरावर कहते हैं कि निवर्तमान सासंद और पलामू के भाजपा प्रत्याशी वीडी राम उनके भगीनदामाद हैं। पूर्व सांसद घूरन राम व निवर्तमान सांसद वीडी राम ने पलामू संसदीय क्षेत्र के लिए कुछ नहीं किया।

वे सामाजिक न्याय की लड़ाई लडऩे के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। इधर, जोरावर के दोनों पुत्र राकेश व राजेश कहते हैं कि उनके पिताजी की हार तय है। दोनों ने महागठबंधन का पक्ष लेते हुए राजद प्रत्याशी की जीत का दावा किया। इस दौरान उनके बड़े पुत्र राकेश पासवान बोले, झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की चुनावी सभा है। इसके लिए उन्हें नावाबाजार जाना है। इसके बाद वे निकल पड़ते हैं।

उनके जाने के बाद राजेश रौशन कहते हैं, सिद्धांत ही सर्वोपरि होना चाहिए। अलग-अलग ही सही, राजनीतिक धर्म का हर हाल में पालन करेंगे। 76 वर्षीय जोरावर राम कहते हैं, लोकतंत्र की यही विशेषता है कि सब आजाद हैं। किसी पर अपना विचार व सिद्धांत थोपना लोकतंत्र को कमजोर करना है। कहा कि उनके दोनों बेटे उनके साथ हों या न हों, लाखों जनता उनके साथ है। यही उनकी सबसे बड़ी पूंजी साबित होगी।

Posted By: Sujeet Kumar Suman

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