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झारखंड में 11-12वीं के वोकेशनल छात्रों के लिए 80 घंटे की इंडस्ट्रियल इंटर्नशिप अनिवार्य, 2026-27 से लागू

Published: Mon, 28 Sep 2026 11:14 AM (IST)

झारखंड के सरकारी स्कूलों में 11वीं और 12वीं के वोकेशनल छात्रों के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 80 घंटे का ...और पढ़ें

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी व्यवस्था, ट्रेड से जुड़े प्रतिष्ठानों में मिलेगी प्रशिक्षण की सुविधा। (तस्वीर: सांकेतिक)

शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होगी व्यवस्था, ट्रेड से जुड़े प्रतिष्ठानों में मिलेगी प्रशिक्षण की सुविधा। (तस्वीर: सांकेतिक)

HighLights

  1. 11वीं-12वीं के वोकेशनल छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण अनिवार्य।

  2. शैक्षणिक सत्र 2026-27 से 80 घंटे की इंटर्नशिप लागू।

  3. ऑनलाइन/ऑफलाइन माध्यम से प्रतिष्ठानों में मिलेगी सुविधा।

जागरण संवाददाता, मेदिनीनगर (पलामू)। पलामू जिला समेत झारखंड के सरकारी स्कूलों में 11वीं और 12वीं के वोकेशनल छात्रों को अब पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी लेना होगा। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्रत्येक विद्यार्थी के लिए कम से कम 80 घंटे की इंटर्नशिप अनिवार्य कर दी गई है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इसके लिए दिशा-निर्देश जारी करते हुए ट्रेड और जाब रोल के अनुसार विद्यार्थियों को संबंधित प्रतिष्ठानों से जोड़ने की व्यवस्था की है। इंटर्नशिप ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से पूरी की जा सकेगी।

विद्यार्थी इसे ग्रीष्मकालीन या शीतकालीन अवकाश, स्कूल अवधि अथवा सप्ताहांत में पूरा कर सकेंगे। ऑफलाइन इंटर्नशिप के लिए ट्रेड से संबंधित नजदीकी सूक्ष्म, लघु, मध्यम या बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से समन्वय किया जाएगा। ऑफलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं होने पर आनलाइन इंटर्नशिप का विकल्प दिया जाएगा।

पोर्टल से होगी विद्यार्थियों की मैपिंग

वोकेशनल ट्रेनर (वीटी) और माॅनिटरिंग रिसोर्स पर्सन वीटी पोर्टल पर नियोक्ताओं का विवरण दर्ज कर विद्यार्थियों की मैपिंग करेंगे। 80 घंटे की इंटर्नशिप अलग-अलग समयावधि में पूरी की जा सकेगी।रोजाना चार घंटे इंटर्नशिप करने पर 20 दिन, पांच घंटे पर 16 दिन, छह घंटे पर 14 दिन, सात घंटे पर 12 दिन और आठ घंटे प्रतिदिन करने पर 10 दिनों में इंटर्नशिप पूरी की जा सकती है।

कर्मचारियों की संख्या के आधार पर होगा आवंटन

प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या के आधार पर विद्यार्थियों का आवंटन किया जाएगा। पांच से कम कर्मचारी वाले संस्थान में दो छात्र-छात्राओं को इंटर्नशिप के लिए भेजा जाएगा।

पांच से 10 कर्मचारी वाले संस्थान में पांच और 10 से 20 कर्मचारी वाले प्रतिष्ठान में 10 विद्यार्थियों को भेजा जाएगा। कर्मचारियों की संख्या अधिक होने पर उसी अनुपात में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाई जा सकती है।