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झारखंड के रेल यात्रियों से 168 करोड़ वसूले, ट्रेनें 55 KM की रफ्तार से भी पीछे; CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Published: Mon, 24 Aug 2026 10:00 AM (IST)

कैग रिपोर्ट ने पूर्व मध्य रेलवे की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, जिसमें झारखंड के रेल यात्रियों के साथ सुविधाओं ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. 168 करोड़ सुपरफास्ट शुल्क वसूला, 100 ट्रेनें धीमी गति से चलीं।

  2. झारखंड में उपनगरीय शेड नहीं, बिहार में तीन मौजूद।

केतन आनंद, मेदिनीनगर (पलामू)। भारतीय रेल में गैर उपनगरीय रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं व स्वच्छता पर भारत के नियंत्रण नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में झारखंड के रेल यात्रियों के साथ सौतेले व्यवहार करने का मामला उजागर हुआ है।

लेखा परीक्षा रिपोर्ट संख्या 31, वर्ष 2026 के पृष्ठ संख्या 30 में रेल यात्रियों से सुपर फास्ट शुल्क के नाम पर 168 करोड़ रुपये वसूलने, स्टेशनों पर चिकित्सा सुविधा के अभाव पर देश की सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्था की रिपोर्ट ने पूर्व मध्य रेलवे की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लेखा परीक्षा के अनुसार, 2022-23 में रेलवे ने यात्रियों से 168 करोड़ रुपये का तीव्रगामी शुल्क वसूला गया। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि 190 से अधिक गाड़ियों में से 100 गाड़ियां 55 किलोमीटर प्रति घंटे की निर्धारित औसत गति भी हासिल नहीं कर पाईं। जब गाड़ी तय मानक की गति ही पूरी नहीं कर रही तो यात्रियों से तीव्रगामी शुल्क लेने पर सवाल उठाए गए है।

रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व मध्य रेलवे का 2,976 किलोमीटर नेटवर्क बिहार में है तो 1,092 किलोमीटर झारखंड में। लेकिन सुविधाओं में जमीन-आसमान का अंतर है। बिहार में 3 उपनगरीय गाड़ी रखरखाव शेडगया, सोनपुर व झाझा लेकिन झारखंड में एक भी उपनगरीय गाड़ी रख रख रखाव शेड नहीं है। पूर्व मध्य रेलवे की करीब 172 उपनगरीय सेवाओं में से झारखंड को सिर्फ 6 सेवाएं ही मिल पाती हैं।

बताया जाता है झारखंड का कोयला चाहिए तो रफ्तार तेज, झारखंड के यात्रियों को लोकल गाड़ी चाहिए तो भगवान भरोसे। रेल उपयोगकर्ताओं से संवाद का सरकारी तंत्र मानी जाने वाली रेल उपयोगकर्ता परामर्श समिति की बैठकों में भी धनबाद मंडल पीछे है। लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार 2022-23 में धनबाद मंडल में दो बैठकें कम हुईं, जबकि 2023-24 में एक बैठक कम हुई।

पूरे पूर्व मध्य रेलवे में कई मंडलों में बैठकें निर्धारित संख्या से कम रहीं। झारखंड रेल यूजर संगठन के संयुक्त सचिव मृत्युंजय कुमार शर्मा ने बताया कि धनबाद मंडल रेल उपयोगकर्ता परामर्श समिति की बैठक कराना भी जरूरी नहीं समझता।

स्टेशनों पर चिकित्सा आपातकाल का हाल बेहाल

लेखापरीक्षा ने 512 स्टेशनों की जांच की। रिपोर्ट के अनुसार 441 यानी 86 प्रतिशत स्टेशनों पर न आपातकालीन चिकित्सा कक्ष था, न अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा सुझाया गया प्राथमिक चिकित्सा डिब्बा। 15 स्टेशनों पर कक्ष होने के बावजूद जरूरी दवाएं नहीं थीं। अब स्टेशन पर अचानक तबीयत बिगड़ने पर तत्काल सहायता कैसे मिले इस पर सवाल उठाए गए है।

यहीं नहीं राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देश के बाद 2019 में रेलवे बोर्ड ने 720 प्रमुख स्टेशनों के लिए विशेष वेब पृष्ठ बनाने का आदेश दिया था। इन पर सफाई, सुविधाओं और जनता की राय की जानकारी होनी थी। लेकिन लेखा परीक्षा ने पाया कि किसी भी क्षेत्र ने ऐसे वेबपृष्ठ नहीं बनाए।

झारखंड रेल यूजर्स के अध्यक्ष कुमार अभिषेक सिंह व प्रवक्ता अंकू सिंह राणा ने बताया कि धनबाद रेल मंडल से पिछले वित्तीय वर्ष में माल ढुलाई से रेलवे को 36 हजार 688 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। जब तक रेलवे व्यवस्था की समीक्षा कर यात्रियों के साथ न्याय नहीं करता, तब तक उपनगरीय गाड़ी शेड, विश्वस्तरीय सुविधा और लंबी दूरी की तीव्रगामी गाड़ी की उम्मीद करना बेमानी है।