ट्यूशन पढ़ाकर पूरी की पढ़ाई, अब दक्षिण कोरिया से सऊदी अरब तक पाकुड़ के लाल की पहचान
झारखंड के पाकुड़ निवासी प्रो. डॉ. मोहम्मद अजमल अली ने ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई पूरी की और अब सऊदी अरब के किंग सऊद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।

प्रो. मोहम्मद अजमल अली की उपलब्धि युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
HighLights
पाकुड़ के अजमल अली बने किंग सऊद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर।
ट्यूशन पढ़ाकर पूरी की पढ़ाई, बने शीर्ष 2% वैज्ञानिक।
स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर सूची में लगातार चौथे साल शामिल।
रोहित कुमार, पाकुड़। प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती। दृढ़ इच्छाशक्ति, मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण हो, तो अभावों के बीच भी सफलता की राह बनाई जा सकती है। झारखंड के पिछले जिले पाकुड़ के नामोंपाड़ा निवासी प्रो. डॉ. मोहम्मद अजमल अली की जीवन यात्रा इसकी मिसाल है।
कभी अपनी पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए ट्यूशन पढ़ाने वाले अजमल अली आज सऊदी अरब के प्रतिष्ठित किंग सऊद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं।
लगातार चौथे साल 2026 में भी स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर सूची में दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों में उनका नाम शामिल होना उनकी शैक्षणिक और शोध यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
उनके पिता मोहम्मद अब्बास शिक्षक थे। सीमित आर्थिक संसाधनों के बीच पढ़ाई जारी रखने के लिए अजमल अली ने संघर्ष किया। आज उनकी उपलब्धि न केवल पाकुड़, बल्कि उन विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणा है, जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
आर्थिक तंगी के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई
प्रो.अजमल अली का शैक्षणिक सफर आसान नहीं रहा। पढ़ाई का खर्च जुटाने के लिए उन्हें ट्यूशन पढ़ाना पड़ा। इससे होने वाली आमदनी से वे अपनी शैक्षणिक जरूरतें पूरी करने का प्रयास करते थे।
उन्होंने भागलपुर स्थित तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2006 में इसी विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में पीएचडी हासिल की।
इसके साथ ही उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया। अजमल का कहना है कि कठिन परिश्रम और दृढ इच्छा शक्ति ही उनकी सफलता का आधार बनी।
भागलपुर से दक्षिण कोरिया तक पहुंचा सफर
पीएचडी पूरी करने के बाद प्रो. अजमल अली को दक्षिण कोरिया के डेजान स्थित कोरिया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ बायोसाइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी (केआरआईबीबी) में पोस्टडॉक्टोरल अनुसंधान का अवसर मिला।
अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान में काम करने से उनके वैज्ञानिक अनुभव को विस्तार मिला और अनुसंधान के नए अवसर खुले। वर्ष 2010 में वे सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग सऊद विश्वविद्यालय से जुड़े।
वर्तमान में वे विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ साइंस के वनस्पति विज्ञान एवं सूक्ष्मजीव विज्ञान विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यरत हैं। अध्यापन के साथ वे वैज्ञानिक अनुसंधान और शोधार्थियों के मार्गदर्शन में भी योगदान दे रहे हैं।
पौधों की विविधता और विकास पर शोध
प्रो.अजमल अली का शोध मुख्य रूप से पौधों की पहचान, वर्गीकरण, आनुवंशिक विविधता और विकासवादी संबंधों पर केंद्रित है। डीएनए अनुक्रमण, जीनोमिक्स और आणविक वर्गिकी जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से वे पौधों की विविधता और उनके विकास को समझने का प्रयास करते हैं।
मरुस्थलीय पौधों में सूखे और उच्च तापमान जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता भी उनके शोध के महत्वपूर्ण विषयों में शामिल है।
उनका कार्य पर्यावरणीय बदलावों के बीच पौधों के अनुकूलन को समझने में सहायक है। शोध के अलावा वे वैज्ञानिक लेखन, शोध परियोजनाओं और युवा वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन से भी जुड़े हैं।
शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में स्थान
प्रो. मोहम्मद अजमल अली की उपलब्धियों में वर्ष 2026 की स्टैनफोर्ड-एल्सेवियर सूची में शामिल होना एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, जीवविज्ञान के अंतर्गत प्लांट बायोलॉजी और बाटनी उनके शोध के प्रमुख क्षेत्र हैं। सूची में उनकी वैश्विक रैंक 1,35,468 और संबंधित उपक्षेत्र में रैंक 2,332 बताई गई है।
प्रो. अजमल अली की यात्रा बताती है कि आर्थिक कठिनाइयां किसी विद्यार्थी की संभावनाओं का अंतिम निर्धारण नहीं करतीं। निरंतर मेहनत, धैर्य और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता से सीमित संसाधनों के बीच भी आगे बढ़ा जा सकता है।
