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पाकुड़ : पंचायत भवन में चल रहा था अवैध हॉस्टल, आठ साल की पहाड़िया बच्ची की मौत के बाद जागा प्रशासन

By Shankar PramanikEdited By: Shiv Govind Mishraa
Published: Thu, 15 Oct 2026 12:35 AM (GMT+05:30)

पाकुड़ के बांडू स्थित पुराने पंचायत भवन में अवैध रूप से संचालित मिशन इंडिया मूवमेंट के छात्रावास में आठ वर्षीय बच्ची रजनी पहाड़िन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. अवैध छात्रावास में 8 वर्षीय बच्ची की संदिग्ध मौत।

  2. मिशन इंडिया मूवमेंट संचालित, प्रशासन को नहीं थी खबर।

  3. बच्चों को जमीन पर सुलाया जाता था, सुविधाओं पर सवाल।

शंकर प्रमाणिक, पाकुड़। प्रखंड के बांडू स्थित पुराने पंचायत भवन में मिशन इंडिया मूवमेंट नामक गैर सरकारी संस्था की ओर से अवैध तरीके से छात्रावास संचालित किया जा रहा था। इसी छात्रावास में सोमवार की रात आठ वर्षीय बच्ची रजनी पहाड़िन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रावास के संचालन, बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और उनके विद्यालयों में नामांकन एवं संबंधित विभाग की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

अंचल प्रशासन के अनुसार, पंचायत भवन में छात्रावास संचालित किए जाने की जानकारी उसे नहीं थी। मामले की जांच की जा रही है। मृत बच्ची रजनी पहाड़िन के पिता जबरा पहाड़िया साहिबगंज जिले के तालझारी प्रखंड के बेहड़ा गांव के निवासी हैं। संस्था के मैनेजर सोमन मालतो के अनुसार, रात में बच्ची को अचानक मिर्गी का दौरा पड़ा। इसके बाद उसे तत्काल स्थानीय चिकित्सक से उपचार दिलाया गया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। हालांकि, बच्ची की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पहले निजी भवन में चल रहा था छात्रावास

जानकारी के अनुसार, मिशन इंडिया मूवमेंट चेन्नई की ओर से वर्ष 2024 से बांडू गांव के एक निजी आवास में छात्रावास संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि इसके लिए शिक्षा विभाग को सूचना नहीं दी गई थी। बाद में संस्था ने बांडू के पुराने पंचायत भवन में छात्रावास संचालित करना शुरू कर दिया। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां करीब 80 छात्र-छात्राओं को शिक्षा देने के उद्देश्य से रखा गया था।

हालांकि, संस्था के पास छात्रावास संचालन की अनुमति थी या नहीं, इसकी पुष्टि संबंधित अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकेगी। छात्रावास में बच्चों के रहने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि बच्चों को बिस्तर के बजाय जमीन पर तिरपाल बिछाकर सुलाया जाता था। स्नान करने और कपड़े धोने के लिए उन्हें बांडू नाला ले जाया जाता था। भोजन की गुणवत्ता को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।

दूसरे जिलों के बच्चों के नामांकन पर सवाल

संस्था से जुड़े बच्चों का प्रखंड के तीन सरकारी विद्यालयों में नामांकन कराए जाने की जानकारी भी सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अप्रैल 2024 से नव प्राथमिक विद्यालय में पहली से चौथी कक्षा तक 20 बच्चों और उत्क्रमित मध्य विद्यालय बांडू में छठी से आठवीं कक्षा तक 20 बच्चों का नामांकन कराया गया। वहीं, अप्रैल 2026 में सात बच्चों का नामांकन उत्क्रमित उच्च विद्यालय महुलबोना में नौवीं कक्षा में कराया गया।

इस तरह इन तीनों विद्यालयों में कुल 47 बच्चों के नामांकन की जानकारी मिली है। संबंधित विद्यालयों के शिक्षकों के अनुसार, करीब 80 प्रतिशत बच्चे साहिबगंज जिले के बोरियो, बरहेट, तालझारी और तीनपहाड़ क्षेत्र के अलावा गोड्डा जिले के बोआरीजोर तथा सुंदरपहाड़ी प्रखंड के रहने वाले हैं। शिक्षकों ने बताया कि बच्चों का नामांकन तत्कालीन प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी के निर्देश पर लिया गया था।

प्रशासन को नहीं थी छात्रावास की जानकारी

इस संबंध में अंचल अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि बांडू के पुराने पंचायत भवन में मिशन इंडिया मूवमेंट की ओर से छात्रावास संचालित किए जाने की जानकारी प्रशासन को नहीं थी। क्षेत्र में किसी गैर सरकारी संस्था की ओर से विद्यालय या छात्रावास चलाने की सूचना भी नहीं दी गई थी। पंचायत भवन में छात्रावास किसकी अनुमति से संचालित किया जा रहा था, इसकी जांच की जा रही है।