पति को बंधक बनाकर पत्नी से गैंगरेप, पाकुड़ कोर्ट ने नौ दोषियों को सुनाई उम्रकैद; जुर्माने की राशि पीड़िता को मिलेगी
Pakur News: जून 2024 के सामूहिक दुष्कर्म मामले में नौ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी ...और पढ़ें

पाकुड़ गैंगरेप केस में दोषियों को सजा। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
नौ दोषियों को पाकुड़ कोर्ट ने आजीवन कारावास सुनाया।
प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।
जुर्माने की राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में मिलेगी।
जागरण संवाददाता, पाकुड़। हिरणपुर थाना क्षेत्र में जून 2024 में हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश-प्रथम, पाकुड़ कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने नौ दोषियों को अंतिम सांस तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
अदालत ने अपने आदेश में जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में देने का निर्देश दिया है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), पाकुड़ को पीड़ित मुआवजा योजना के तहत पीड़िता के लिए अतिरिक्त उचित मुआवजा निर्धारित करने का आदेश दिया है।
पति को बंधक बनाकर की थी वारदात
प्राथमिकी के अनुसार घटना एक जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में हुई थी। पीड़िता अपने पति के साथ वहां गई थी। इसी दौरान आरोपित वहां पहुंचे और पीड़िता के पति को बंधक बना लिया। इसके बाद पीड़िता को झाड़ियों की ओर ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया गया। मामले में हिरणपुर थाना में कांड दर्ज किया गया था।
छह गवाहों के बयान हुए दर्ज
सत्र वाद संख्या 143/2024 में अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर नौ आरोपितों को दोषी करार दिया। दोषियों में मानवेन मरांडी, चंदन सोरेन उर्फ चांद सोरेन, विवेक सोरेन, लखीराम मृधा उर्फ बाबूलाल मरांडी, जेने हांसदा, विश्वनाथ हेम्ब्रम, पांडु हेम्ब्रम, मिस्त्री हेम्ब्रम और सकल हांसदा शामिल हैं। सभी हिरणपुर थाना क्षेत्र के कस्तूरी गांव के निवासी हैं।
अदालत ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए कहा कि ऐसी घटना पीड़िता को गहरी पीड़ा पहुंचाने के साथ समाज की संवेदनशीलता को भी प्रभावित करती है।
बचाव पक्ष की ओर से दोषियों की उम्र को देखते हुए नरमी बरतने की अपील की गई, जिसे न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया। अदालत ने महिलाओं की सुरक्षा को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए जघन्य अपराधों में कठोर दंड की आवश्यकता पर जोर दिया।
