संवाद सहयोगी,पाकुड़ : कोटपा (सिगरेट एंड अंडर टोबैको प्रोडक्ट एक्ट- 2003) में किए गए संशोधन को लेकर बीड़ी बनाने वाली महिला मजदूरों ने केंद्र सरकार के खिलाफ मंगलवार को विरोध-प्रदर्शन किया। सदर प्रखंड के नारायणखोर गांव की दर्जनों महिलाओं ने कोटपा कानून में संशोधन किये जाने के विरुद्ध सड़क पर उतर कर नाराजगी जाहीर की। केंद्र सरकार से कोटपा कानून वापस लेने की मांग कर रही थी। बीड़ी मजदूरों ने काला कानून वापस लो, बीड़ी मजदूरों का रोजगार मत छीनो आदि नारे लगाएं। इस मौके पर मानुवारा बीवी, मेहनेगार बीवी, ताजेमा बेवा, हुरो बीवी, हुसनारा बीवी आदि महिलाओं ने कहा कि सरकार रोजगार नहीं दे सकती है, तो उन्हें रोजगार छीनने का भी कोई अधिकार नहीं है। गांव की महिलाएं वर्षो से बीड़ी बनाकर परिवार चलाते आ रही हैं। बीड़ी बांधकर बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठाती हैं, लेकिन केंद्र सरकार ने कानून में संशोधन कर महिला बीड़ी मजदूरों को परेशानी में डाल दिया है। ग्रामीण महिला बीड़ी मजदूरों को रोजगार छीनने का डर सताने लगा है। महिलाओं ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में केंद्र सरकार के इस संशोधित कानून को स्वीकार नहीं करेंगे। केंद्र सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती है, तो महिलाएं परिवार के साथ सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन करेंगी।

ज्ञात हो कि केंद्र सरकार ने कोटपा कानून में संशोधन कर बीड़ी कंपनियों को कई शर्तो का पालन करने का फरमान जारी किया है। इसके आधार पर बीड़ी के बंडल में 90 प्रतिशत हिस्से में स्वास्थ्य संबंधी चेतावनी रहेगी। बंडल के शेष बचे हिस्से में बीड़ी निर्माण और निर्माता से संबंधित सूचनाएं होगी। इसमें सबसे विशेष बात यह है कि बीड़ी कंपनी अपना ब्रांड नहीं छाप सकेंगे। इसका सीधा असर बीड़ी कंपनियों पर पड़ेगा।

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