लोहरदगा : जल संकट की भयावह स्थिति को देखते हुए अब सरकारी तंत्र भी जल संरक्षण और जल संचयन की दिशा में सक्रिय होने लगे हैं। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले सक्रियता दिखाई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम को बढ़ावा देने को लेकर सदर अस्पताल परिसर में रिचार्ज पिट का निर्माण किया जा रहा है। उपायुक्त आकांक्षा रंजन के निर्देश पर सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार की निगरानी में वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम के तहत काम हो रहा है। इस काम के माध्यम से अब वर्षा जल को यूं बहकर बर्बाद होने के बजाय भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाया जाएगा। सदर अस्पताल में भूगर्भ जल स्तर की स्थिति चितित करने वाली रही है। अस्पताल में अब तक कुल 9 डीप बोरिग किए गए हैं। सभी के सभी योजनाएं फेल हुई है। अस्पताल परिसर में 1000 फीट से ज्यादा बोरिग करने के बाद भी पानी नसीब ना हुआ। ऐसे में सदर अस्पताल परिसर को ड्राई जोन कहना गलत नहीं होगा। इन तमाम समस्याओं को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जिला स्तरीय बैठक में इन बातों को रखा था। जिसके बाद डीसी के निर्देश पर वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम लागू करने की दिशा में पहल हुई है।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से 25 हजार रुपये खर्च कर रिचार्ज पिट और वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम का निर्माण किया जा रहा है। बरसात में यूं ही बहकर बर्बाद होने वाले पानी को अब जमीन के नीचे ले जाकर भूगर्भ जल स्तर को बढ़ाया जाएगा। जिससे आने वाले समय में सदर अस्पताल को ड्राई जोन के अभिशाप से बाहर निकाला जा सके। स्वास्थ्य विभाग के इस प्रयास की प्रशंसा करनी होगी। सरकारी तंत्र में सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में अपनी सक्रियता और संवेदनशीलता को प्रदर्शित किया है। स्वास्थ्य विभाग की पहल की वजह से दूसरे विभागों और आम लोगों को भी प्रेरित होने का मौका मिल पाएगा। अगले 2 दिनों में इस योजना को पूर्ण कर लिया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ वर्षों में जल समस्या के निदान की दिशा में वाटर हार्वेस्टिग सिस्टम कारगर साबित होगा। सदर अस्पताल को ड्राई जोन के अभिशाप से मुक्ति मिल पाएगी।

Posted By: Jagran