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गुमला : नक्सल प्रभावित गांवों में न ढंग से खेती होती है और न ही सिचाई की सुविधा नजर आती है। जीने के लिए लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों और महानगरों में पलायन करने को विवश हैं। गांव में रहने पर युवक युवतियों को नक्सली अपने संगठन से जोड़ने का दबाव बनाते थे। पुलिस नक्सलियों का समर्थक बताकर गिरफ्तार करती थी। मुकदमा लादती थी। इसलिए पलायन करने के अलावे नक्सल प्रभावित इलाकों में युवक युवतियों के पास कोई विकल्प भी नहीं बचा था। चुनाव के समय नक्सलियों के वोट बहिष्कार का फरमान जारी होता था। नक्सलियों का वर्चस्व होने के कारण लोग मतदान के लिए घरों से नहीं निकलते थे। लेकिन अब पहले वाली स्थिति नहीं रही। बड़े और कुख्यात अपराधी आत्मसर्पण कर चुके हैं। भय नाम का चीज नहीं रह गया है। इसलिए चुनाव में मतदान करने के लिए अपने घरों को लौटने लगे हैं। बिशुनपुर प्रखंड के जमटी गांव के सूरज कुम्हार कहते हैं कि वे कमाने मुंबई गए थे। इस गांव से सौ से डेढ़ सौ के बीच युवक युवती बाहर कमाने गए हुए हैं। लेकिन बहुत से युवक युवतियां मतदान करने के लिए अपने घर लौट आएं हैं। यूपी के सिद्धार्थ नगर से भी काम कर अपने घर लौटे हैं। विपिन उरांव भी कहते हैं गांव में काम नहीं मिलता है। 20 से 30 फीसद लोग काम के तलाश में बाहर गए हुए थे। बहुत से लोग वोट देने के लिए गांव वापस आ गए हैं। लोगों में मतदान का उत्साह दिख रहा है।

Posted By: Jagran

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