लोहरदगा : पवित्र रमजान के महीने में मुस्लिम धर्मावलंबियों के लिए अल्लाह की इबादत का अलग ही शमा होता है। मुस्लिम धर्मावलंबी अल्लाह से जीवन में सुख-शांति की प्रार्थना करने के साथ-साथ जाने-अनजाने में हुए गुनाह की माफी भी मांगते हैं। इन सबके बीच नन्हें रोजेदार भी रोजा रखकर अल्लाह से दुआ मांग रहे हैं। रमजान के महीने में नन्हें रोजेदार अपने अभिभावकों के साथ न सिर्फ मस्जिद में नमाज के लिए पहुंच रहे हैं बल्कि हर रोज सेहरी और इफ्तार में भी शांमिल होते हैं। नमाज और कुरान की तिलावत करते इन नन्हें रोजेदारों को देखकर ही उपर वाले पर विश्वास बढ़ जाता है। नन्हें रोजेदार सेन्हा निवासी नुजहत परवीन और तस्लीम अंसारी कहते हैं कि उन्हें रोजा रखना काफी पसंद है। रोजा रखने से आत्म संतुष्टि मिलती है। नन्हें रोजेदार नासरीन खातून, चांदनी खातून का कहना है कि रोजा हमारे अंदर एक ऊर्जा का काम करता है। काफी अच्छा लगता है जब हम माता-पिता के साथ रोजा रखते हैं। सनाउल्लाह अंसारी, शुएब अंसारी, अफरोज और माहिरा फिरोज कहती हैं कि रोजा सभी को रखना चाहिए। यह हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। हम सभी को रोजा रखना ही चाहिए।

Posted By: Jagran

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