लोहरदगा : लोहरदगा जिला मुख्यालय को राजधानी रांची से जोड़ने वाली मुख्य सड़क लोहरदगा-बेड़ो मुख्य पथ में साल 2017 में कोयल नदी पर सिठियो के समीप हुए भयानक हादसे से भी जिला प्रशासन और पथ निर्माण विभाग ने े सीख नहीं ली। वर्ष 2017 में बरसात में कोयल नदी पर बाढ़ की चपेट में आने से बहकर 4 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद स्थानीय जिला प्रशासन के साथ-साथ प्रतिनिधियों ने भी घोषणा की थी कि जल्द ही कोयल नदी पर दूसरे पुल का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। बावजूद इसके पुल निर्माण की दिशा में गति दिखाई नहीं देती है। संकट बरकरार है और विभाग सुस्त। 2016 में शुरू हुआ था निर्माण

: कोयल नदी पर साल 2016 से ही एक दूसरे पुल का निर्माण कार्य 6 करोड़ 84 लाख रुपए की लागत से पथ निर्माण विभाग पथ प्रमंडल द्वारा कराया जा रहा है। पुराने पुल से नए पुल की ऊंचाई 3 मीटर अधिक है। ऐसे में विभाग का दावा है कि चाहे कुछ भी हो जाए, कितनी भी बारिश हो, पानी पुल के ऊपर से नहीं बहेगा। पिछले साल जो घटना हुई थी, उसमें पुल के ऊपर से बह रहे पानी के बीच एक मरीज को रांची लेकर जा रहा डाल्टेनगंज का एक परिवार एंबुलेंस सहित कोयल नदी की बाढ़ में बह गया था। इस घटना में एम्बुलेंस चालक सहित दो लोग की ¨जदगी ही बच पाई थी, जबकि 4 लोगों की मौत हो गई थी। जिनमें से दो लोगों का शव तो कुछ समय बाद बरामद हो गया, पर दो लोगों का शव मिल भी नहीं पाया। आवश्यक जांच प्रक्रिया के बाद उन दोनों को भी मृत मान लिया गया।

घटना के बाद प्रशासन हुआ था रेस

लोहरदगा : इस घटना को लेकर जिला प्रशासन ने पथ निर्माण विभाग पथ प्रमंडल को निर्देश देते हुए कहा था कि किसी भी हाल में जनवरी 2018 तक पुल का निर्माण कार्य पूरा कर लें। परंतु अभी तक पुल का स्पेन ही खड़ा हो पाया है। कुछ कहने से कतरा रहे अधिकारी

पथ निर्माण विभाग पथ प्रमंडल की कनीय अभियंता संध्या अग्रवाल ने मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। उन्होंने बस इतना ही कहा कि अगले साल तक हम पुल को पूरा कर लेंगे। तीन बार मॉडल रिवाइज होने की वजह से पुल समय पर पूरा नहीं हो पाया है। काम तेजी से चल रहा है।

Posted By: Jagran

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