जागरण संवाददाता, लातेहार :

आयुर्वेद में हजारों साल से आंवले का प्रयोग औषधि के तौर पर किया जाता रहा है। यह हर वर्ग के लिए लाभकारी है। आंवला को तमाम औषधीय गुणों के खजाने साथ इसे काफी पूज्यनीय माना जाता है। मान्यता के मुताबिक, इसमें वास्तुदोष दूर करने का गुण भी होता है। आंवला का फल ही नहीं इसके पेड़ की छांव से भी कई रोग भाग जाते हैं।

लातेहार में मिलता है कम रेशे वाला छोटा आंवला

लातेहार जिले में कुछ स्थानों पर आंवले का वृक्ष हैं। जिनसे उत्पादित फसल को प्राप्त कर ग्रामीण उसका खुद उपयोग करते हैं और कई स्थानों पर उसे बाजारों में भी बेच देते हैं। लातेहार शहरी क्षेत्र में दुग्ध शीतक केंद्र के पीछे पूर्वी दिशा की ओर तापा पहाड़ी की तराई में आंवला के कई पेड़ हैं। अक्षय नवमी के दिन यहां पर मेले का भी आयोजन होता है और आंवला पूजा ग्रामीणों की ओर से आयोजित होती है। इसके अलावा जिले के गारू और महुआडांड़ के जंगली इलाकों में भी कुछ स्थानों पर आंवले के वृक्ष पाए जाते हैं। अन्य जगहों की तुलना में लातेहार जिले में पाए जाने वाले आंवले का आकार छोटा होता है और कम रेशा होने के कारण इसका उपयोग ग्रामीणों की ओर से मुरब्बा बनाने के अलावा अधिकांश तौर पर अंचार बनाने में किया जाता है।

आयुर्वेद मामलों की जानकार शिक्षक गणेश पासवान ने बताया कि आंवले में विटामिन-सी होता है, जो बालों को घना और चेहरे को चमकदार बनाता है। आंवला मूत्र संक्रमण की बीमारी को दूर करता है। आंवला मानसिक रूप से स्वस्थ बनाए रखता है। आंवला कब्ज से मुक्ति दलाने के साथ ही पेट को साफ रखता है। साथ ही मोटापे को कम करके पेट फूलने की परेशानी से भी निजात दिलाता है।

Posted By: Jagran

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