उत्कर्ष पांडेय, लातेहार : कोरोना काल के दौरान नक्सल प्रभावित लातेहार जिले में सरकारी स्कूल बंद हुए तो उत्क्रमित उच्च विद्यालय जलता के शिक्षक आशीष कुमार ने नक्सल प्रभावित सुदूर गांवों में बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया। खास बात यह कि आशीष ने इस कार्य के लिए पढ़े लिखे युवाओं को भी जागरूक किया और गांव की क्लास नामक अपनी मुहिम में इन्हें भी जोड़ दिया। अभी यह अभियान जिले के सुदूरवर्ती 13 गांवों में चल रहा है और 1800 बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शिक्षक आशीष कुमार ने बताया कि गांवों में बच्चों की पढ़ाई खासा प्रभावित हो रही थी। कई गांवों में आनलाइन क्लास चलाना भी मुमकिन नहीं था। गांवों में ज्यादातर बच्चों के पास एंड्राइड मोबाइल नहीं था। तब खुद ही कुछ गांवों में जाकर पढ़ाना शुरू किया। मगर बहुत कम बच्चे ही पढ़ पा रहे थे, तब मैंने गांव के कुछ बड़े विद्यार्थी जो इंटर या ग्रेजुएशन कर रहे हैं, उनको छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए जोड़ा। यह प्रयास रंग लाया। आशीष ने इस मुहिम को शिक्षक दिवस के दिन पांच सितंबर से शुरू किया।

बच्चों को पढ़ाने वाले युवाओं ने कहा :

इंटर के छात्र अभिनव ने बताया कि अपनी पढ़ाई के बाद खाली समय में घर पर रहता था, लेकिन आशीष सर गांव में पढ़ाने के लिए आते थे। उन्होंने आकर हमें प्रेरित किया कि हम भी छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ा कर उन्हें शिक्षित करें, अब आज हमारे पास सात बच्चे पढ़ने आते हैं और उन्हें पढ़ा कर मुझे बहुत अच्छा लगता है। स्नातक प्रथम वर्ष के छात्र अरुण कुमार ने बताया कि तीन माह से गांव के छोटे बच्चों को पढ़ाते हुए मजा आ रहा है। इस कोरोना के दौर में जब सभी प्राथमिक विद्यालय बंद हैं, तब मैं बच्चों को पढ़ा पा रहा हूं। इससे मुझे भी पढ़ाई का रिवीजन हो जा रहा है। कोट ::

शिक्षा बांटना सबसे बेहतर कार्य है। कोरोना काल में सरकारी निर्देशों का पालन करते हुए युवाओं की टोली ने बच्चों को पढ़ाकर अच्छा काम किया है।

- अबू इमरान, उपायुक्त लातेहार।

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