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झारखंड के लातेहार में भीषण सड़क हादसा, कंटेनर के नीचे दबकर चूर हुआ ऑटो; 7 लोगों की मौत 

By Utkarsh PandeyEdited By: Mansi Kumari
Published: Sat, 15 Aug 2026 05:54 PM (IST)Updated: Sat, 15 Aug 2026 09:21 PM (IST)

लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र में लोहरदगा-चंदवा मुख्य मार्ग पर एक भीषण सड़क दुर्घटना हुई। एक कंटेनर के ऑटो पर ...और पढ़ें

HighLights

  1. लातेहार के चंदवा में भीषण सड़क दुर्घटना हुई।

  2. लोहरदगा-चंदवा मार्ग पर कंटेनर ऑटो पर पलट गया।

जागरण संवाददाता, लातेहार। झारखंड से एक बड़ी खबर सामने आई है। लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र के डेढ़टंगवा घाटी में शनिवार की शाम सड़क ने ऐसा कहर बरपाया कि कुछ ही पलों में सात जिंदगियां खत्म हो गईं। लोहरदगा-चंदवा मुख्य मार्ग पर एक कंटेनर ने पहले बाइक को टक्कर मारी।

बाइक पर एक ही परिवार के चार लोग सवार थे। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार एक महिला उछलकर दूर जा गिरी और उसकी जान बच गई, जबकि बाइक पर सवार अन्य लोग कंटेनर की जद में आ गए।

इसके बाद अनियंत्रित कंटेनर ने सामने चल रहे आटो को भी अपनी चपेट में ले लिया। आटो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके चालक समेत चार लोगों की मौत हो गई। हादसे में कुल सात लोगों की मौत की सूचना है, जबकि एक महिला की जान बच गई।

सासंग से निकले थे, घाटी में थम गई जिंदगी 

जानकारी के अनुसार, लातेहार के सासंग गांव निवासी एक ही परिवार के चार लोग बाइक से लोहरदगा जा रहे थे। इनमें महिला अफसरी देवी भी शामिल थीं। बाइक पर अफसरी देवी, उनके पुत्र असजद अंसारी और उसी परिवार के हारून अंसारी समेत चार लोग सवार थे।

डेढ़टंगवा घाटी में पहुंचते ही सामने से अथवा पीछे से आए कंटेनर ने बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि अफसरी देवी बाइक से उछलकर काफी दूर जा गिरीं। इस कारण वह कंटेनर की सीधी जद में आने से बच गईं और उनकी जान बच गई। हादसे में असजद अंसारी, हारून अंसारी समेत बाइक पर सवार तीन लोगों की मौत हो गई।

तहादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण घटनास्थल की ओर दौड़े। कुछ ही देर में सड़क पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों ने बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस को सूचना दी। अफसरी देवी को तत्काल उपचार के लिए भेजे जाने की जानकारी है।तत

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बाइक के बाद ऑटो को बनाया निशाना

बाइक को टक्कर मारने के बाद भी कंटेनर नियंत्रित नहीं हो सका। वह सड़क पर आगे बढ़ते हुए ऑटो को अपनी चपेट में ले लिया। जिससे ऑटो का पूरा ढांचा बुरी तरह पिचक गया। उसके अंदर बैठे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

ऑटो चालक रकीब खान, पिता रोउप खान, निवासी लोहरदगा की मौके पर ही मौत हो गई। आटो में सवार तीन अन्य लोगों की भी जान चली गई। उनकी पहचान तत्काल नहीं हो सकी थी। कंटेनर के नीचे दबे आटो से शव निकालना बचाव दल के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहा।

लोहे के मलबे में बदल गया ऑटो 

हादसे की तस्वीरें दुर्घटना की भयावहता खुद बयां कर रही थीं। ऑटो पूरी तरह चूर-चूर होकर कंटेनर के नीचे दबा था। उसके पुर्जे सड़क और आसपास के हिस्से में बिखरे पड़े थे। दुर्घटना के बाद मौके पर पहुंचे ग्रामीणों ने जब मलबे में फंसे लोगों को देखा तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। क्रेन की मदद से कंटेनर को हटाया गया और उसके नीचे दबे आटो तक पहुंचने का प्रयास शुरू हुआ।

पुलिस, एंबुलेंस, स्थानीय ग्रामीण और बचाव दल देर तक शवों को बाहर निकालने में जुटे रहे। एक-एक शव निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।

एक महिला दूर जा गिरी, इसलिए बच गई जान 

इस पूरे हादसे में अफसरी देवी का बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है। कंटेनर की टक्कर के बाद वह बाइक से उछलकर दूर जा गिरीं। यदि वह भी बाइक के साथ कंटेनर की सीधी जद में आतीं तो हादसे की त्रासदी और बढ़ जाती।

एक ओर वह गंभीर रूप से हादसे की चपेट में आईं, दूसरी ओर उनके सामने परिवार के लोगों की मौत ने इस हादसे को और दर्दनाक बना दिया। जिस सफर में परिवार के लोग साथ निकले थे, उसी सफर में कुछ ही क्षणों में परिवार उजड़ गया। सासंग गांव में हादसे की खबर पहुंचते ही मातम पसर गया।

घटनास्थल पर उमड़ा जनसैलाब 

दुर्घटना की खबर तेजी से फैलते ही आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। स्थानीय प्रशासनिक पदाधिकारी, पुलिसकर्मी, पंचायत प्रतिनिधि, समाजसेवी और राजनीतिक दलों के नेता भी घटनास्थल पर पहुंचे।

सभी की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालना और घायलों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराना रहा। हादसे के बाद लोहरदगा-चंदवा मुख्य मार्ग पर वाहनों का परिचालन बाधित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। पुलिस ने राहत-बचाव कार्य के साथ यातायात व्यवस्था को भी संभाला।

एक साथ कई परिवारों की खुशियां छीन गईं 

इस हादसे ने एक साथ कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। सासंग के एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत ने गांव को झकझोर दिया है। वहीं लोहरदगा निवासी ऑटो चालक रकीब खान की मौत से उनके परिवार पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। ऑटो में सवार तीन अन्य मृतकों की पहचान नहीं हो पाने के कारण उनके स्वजन तक खबर पहुंचाना भी प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई थी।

डेढ़टंगवा घाटी में देर शाम तक बचाव कार्य चलता रहा। सड़क पर बिखरा मलबा, क्षतिग्रस्त आटो और कंटेनर के बीच पसरा सन्नाटा उस हादसे की भयावह कहानी सुना रहा था। एक कंटेनर ने पहले एक परिवार की खुशियां कुचलीं, फिर ऑटो में सवार चार लोगों की जिंदगी छीन ली। एक महिला इसलिए बच गई क्योंकि टक्कर के साथ वह दूर जा गिरी। मगर उसकी आंखों के सामने उसका अपना परिवार उजड़ गया।

डेढ़टंगवा घाटी की यह दुर्घटना सिर्फ सात मौतों का आंकड़ा नहीं है। यह उन घरों की कहानी है, जहां अब दरवाजे पर लौटने वाले कदमों की जगह मातम पहुंचने वाला है। सड़क पर कुछ ही मिनटों में बिखरे लोहे के टुकड़ों के साथ कई परिवारों के सपने भी बिखर गए।