संवाद सूत्र, चंदवा : एकल महिलाओं को एकजुट होना होगा। तभी उन्हें समाज में सम्मान से जीने का हक और अधिकार प्राप्त होगा। उक्त बातें एकल नारी सशक्ति संगठन की इंद्रावती देवी ने लुकूइया स्कूल में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि समाज एकल महिलाओं को उपेक्षा की निगाह से देखता है। कई बार तो उन्हें डायन करार कर उनकी हत्या तक कर दी जाती है। उनके बच्चों को बाल मजदूर बनाकर दूसरे राज्यों में बेच दिया जाता है। देश का भविष्य कहे जानेवाले ये बच्चे कई बार तो असमय काल के गाल में चले जाते हैं। ऐसे में एकल नारी सशक्ति संगठन अत्याचार और प्रताड़ना से झूलने वालों को न्याय दिलाता है। एकल महिलाओं के प्रति उनके परिवार समाज का नजरिया सही करने के लिए हमें एकजुट होकर मुकाबला करना होगा। संगठन पर चर्चा करते कहा कि चुनौतियों का सामना करते ये महिलाएं समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। संगठित एकल महिलाएं परिवार व समाज द्वारा प्रताड़ना, जमीन संपति पर गैर कानूनी कब्जे व एकल महिलाओं पर हो रहे हिसा का भी मुंहतोड़ जवाब दे रही है। जो एकजुटता से ही संभव हुआ है। इस दौरान महिलाओं पर हो रहे हिसा को रोकने के लिए हवन का आयोजन किया गया। हवन के माध्यम से समाज में फैली कुरीतियों को स्वाहा कर नारी उत्थान का संकल्प लिया गया। बैठक के दौरान एकल महिलाओं को मिलने वाले पेंशन को बढ़ाने, अंत्योदय योजना का लाभ दिलाने, सभी एकल महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास मुहैया कराने तथा भूमि हीन महिलाओं को भूमि का पट्टा देने आदि की मांग की है। मौके पर विमला देवी, सुषमा देवी, प्रफुल्लित बागे, सलोनी बारला, एतवरिया देवी, शुभला देवी, रातो देवी, सुमित्रा देवी, सूरजमनी देवी, मुगली देवी, झुगली देवी समेत अन्य मौजूद थे।

Posted By: Jagran

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