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लातेहार में धूल से परेशान ग्रामीणों ने बंद कराया बाजार, कोयला लदे ट्रकों के खिलाफ सड़क पर उतरे लोग

By Utkarsh PandeyEdited By: Mansi Kumari
Published: Fri, 18 Sep 2026 10:33 AM (IST)

लातेहार के बालूमाथ प्रखंड में कोयला लदे ट्रकों से उड़ने वाली धूल और भारी वाहनों के बढ़ते दबाव से परेशान ...और पढ़ें

धूल और भारी वाहनों के खिलाफ बाजार बंद कर विरोध। जागरण

धूल और भारी वाहनों के खिलाफ बाजार बंद कर विरोध। जागरण

HighLights

  1. बालूमाथ में कोयला ट्रकों की धूल से ग्रामीण परेशान।

  2. धूल और भारी वाहनों के खिलाफ बाजार बंद कर विरोध।

जागरण संवाददाता, लातेहार। इन दिनों जिले के बालूमाथ प्रखंड की सड़कों पर 24 घंटे धूल के गुबार से ग्रामीण परेशान हैं। धूल और भारी वाहनों के बढ़ते दबाव से परेशान ग्रामीणों व दुकानदारों का आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर दिखाई दिया। परेशानियों से निजात की मांग को लेकर बालूमाथ प्रखंड का बाजार पूरी तरह बंद रहा। दुकानों के शटर गिरे रहे और बाजार में सन्नाटा पसरा रहा।

ग्रामीणों ने शांतिपूर्ण तरीके से बंद कर शासन-प्रशासन का ध्यान अपनी समस्या की ओर आकृष्ट कराया। बालूमाथ की प्रमुख सड़कों से दिनभर कोयला लदे ट्रक और हाइवा गुजरते हैं। भारी वाहनों के आवागमन से सड़क पर जमा धूल उड़कर दुकानों और आसपास के घरों तक पहुंचती है।

राहगीरों के साथ दुकानदार भी इससे परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे कारोबार करने वालों के लिए धूल रोज की मुसीबत बन चुकी है। सामान पर धूल की परत जम जाती है और ग्राहकों को भी परेशानी होती है।

धूल के साथ रफ्तार का भी खतरा 

ग्रामीणों की चिंता केवल धूल तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि कोयला लदे भारी वाहन कई बार तेज गति से बाजार से गुजरते हैं। इससे पैदल राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ जाता है।

बाजार क्षेत्र में लगातार भारी वाहनों की आवाजाही के बीच दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों ने परिवहन व्यवस्था को नियंत्रित करने और बाजार क्षेत्र में वाहनों की गति पर प्रभावी अंकुश लगाने की मांग की है।

शांतिपूर्ण आंदोलन व समाधान की उम्मीद

बंद में शामिल ग्रामीणों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद खड़ा करना नहीं है। वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी समस्या शासन-प्रशासन तक पहुंचाना चाहते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि कोयला परिवहन जरूरी है, लेकिन उसकी कीमत स्थानीय लोगों को धूल और असुरक्षित यातायात के रूप में नहीं चुकानी चाहिए।

ग्रामीणों ने सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव, भारी वाहनों की गति नियंत्रित करने और परिवहन व्यवस्था की निगरानी बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन समस्या का स्थायी समाधान निकाले, ताकि कारोबार, आवागमन और कोयला परिवहन तीनों सुचारू रूप से चल सकें। शुक्रवार का बंद इसी मांग को लेकर ग्रामीणों की एकजुटता का संकेत रहा। 

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