लातेहर जंगल में दम तोड़ गया गजराज, आठ दिन बाद भी मौत की वजह स्पष्ट नहीं, वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल
झारखंड के लातेहार जिले के पिपराही जंगल में एक बीमार जंगली हाथी की मौत हो गई। आठ दिन बाद भी ...और पढ़ें

हाथी की प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)
HighLights
लातेहार के पिपराही जंगल में बीमार हाथी की मौत।
आठ दिन बाद शव मिलने से वन विभाग पर सवाल।
ग्रामीणों ने समय पर उपचार न मिलने का आरोप लगाया।
संवाद सूत्र, बालूमाथ (लातेहार)। झारखंड के लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र स्थित गेरंजा गांव के पिपराही जंगल में एक जंगली हाथी की मौत का मामला सामने आया है।
ग्रामीणों के अनुसार, हाथी कुछ दिनों से बीमार था। उसकी मौत के करीब आठ दिन बाद भी शव जंगल में पड़े रहने की बात सामने आने से वन विभाग की कार्यशैली और वन्यजीवों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
बीमार होने की जानकारी के बावजूद उपचार पर सवाल
हालांकि, हाथी की मौत के वास्तविक कारणों की अब तक पुष्टि नहीं हुई है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि हाथी की तबीयत खराब थी।
उनका आरोप है कि यदि समय रहते वन विभाग के अधिकारी सक्रिय होते और उसके उपचार की व्यवस्था की जाती, तो संभव है कि उसकी जान बचाई जा सकती थी।
ग्रामीणों ने मामले की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
हालांकि, हाथी की बीमारी की प्रकृति, उसे समय पर उपचार मिला था या नहीं और उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई, इन बिंदुओं पर आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी।
पहले भी हो चुकी है हाथी की मौत
बालूमाथ क्षेत्र में हाथी की मौत का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले झाबर पंचायत के कोमर गांव स्थित कुसीटोला में करंट की चपेट में आने से एक वयस्क जंगली हाथी की मौत हो गई थी।
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने क्षेत्र में हाथियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक ओर बिजली के तारों से हाथियों की जान जाने का खतरा बना हुआ है।
दूसरी ओर बीमार वन्यजीवों के उपचार और मृत हाथियों के शव के समय पर निस्तारण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
पिपराही जंगल में हाथी का शव कई दिनों तक पड़े रहने की सूचना के बाद यह जानना जरूरी हो गया है कि वन विभाग को घटना की जानकारी कब मिली और उसके बाद क्या कदम उठाए गए।
पोस्टमार्टम के बाद स्पष्ट होगा मौत का कारण
इस संबंध में बालूमाथ के वन क्षेत्र पदाधिकारी नंद मेहता ने बताया कि हाथी की मौत की सूचना मिली है। मेडिकल टीम द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद ही मौत के कारण का स्पष्ट पता चल सकेगा।
फिलहाल, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विभागीय जांच के निष्कर्षों का इंतजार है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि हाथी की मौत किन परिस्थितियों में हुई और शव के निस्तारण में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है।
