लातेहार : घड़ी में शुक्रवार को रात के 11 बज रहे हैं, एनएच के रांची-चतरा मुख्य मार्ग में चकला मोड़ के समीप सड़क किनारे महुआ के एक हरे पेड़ से आग की लपटें उठ रही हैं। एक तरफ बड़ी सी डाल टूटकर गिरी है, जिसने आधी सड़क को घेर लिया है। पेड़ के समीप उठ रही आग के बीच एक बर्तन में कुछ लोग खिचड़ी पका रहे हैं। पास आने पर पता चला कि पेड़ में वज्रपात हुआ है। वज्रपात के बाद लगी आग में ग्रामीण अपनी परंपरा के अनुसार खिचड़ी पका रहे हैं।

खिचड़ी पका रहे राजकुमार लोहरा ने बताया कि वे बालूमाथ के निवासी हैं। गांव वालों के साथ मां उग्रतारा नगर मंदिर से पूजा के बाद भोग का प्रसाद लेकर गांव लौट रहे थे। अचानक बारिश होने लगी तो वे लोग शेड में रुक गए। अचानक तेज आवाज के साथ बिजली चमकी और पेड़ पर गिर गई। पेड़ पर बिजली गिरने से आग लग गई और एक बड़ी सी डाल टूटकर गिर गई। इसके बाद हम लोगों ने परंपरा के अनुसार खिचड़ी बनाना शुरू किया।

राजकुमार लोहरा ने बताया कि हमारे समाज में परंपरा रही है कि जिस पेड़ में वज्रपात से आग लग जाती है। उसी पेड़ की आग से हम लोग खिचड़ी पका कर खाते और खिलाते हैं। मान्यता है कि जिसने खिचड़ी खा ली उसकी सात पीढ़ी में वज्रपात से जानमाल की क्षति नहीं होगी।

------------------- 20 लोगों ने खिचड़ी पकाई, 300 लोगों ने खाई :

पेड़ में लगी आग से शुक्रवार की रात 20 की संख्या में ग्रामीणों ने खिचड़ी पकाई और खिचड़ी का 300 ग्रामीणों के बीच वितरण किया गया। ग्रामीणों ने मार्ग से गुजरने वाले ट्रक डाइवरों को रोककर खिचड़ी खिलाई और इसका कारण भी बताया। इस परंपरा से अनजान ट्रक ड्राइवरों से लेकर लोगों के बीच यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।

---------------------- अपने आप में यह पहला मामला :

स्थानीय ग्रामीण सिरिल तोपनो, शंकर राम, कैलाश राम, विनोद कुमार आदि ने बताया कि इस तरह का यह पहला मामला है। पूर्व में कभी इस तरह वज्रपात से न पेड़ में आग लगी थी और न इस तरह वज्रपात की आग में खिचड़ी पका कार खाना खाने और खिलाने जैसी कोई बात। इलाके में जिसने भी इस मामले को सुना वह पूरी स्थिति को जानने के लिए जिज्ञासु बना रहा।

------------------------- यह अनोखी परंपरा है, पहली बार मुझे इस बारे में जानकारी मिली है। परंपरा के बारे में ठीक से जानकारी लेने के बाद ही कुछ बता सकूंगा।

-राजीव कुमार, उपायुक्त लातेहार।

Posted By: Jagran